भरतपुर। भरतपुर जिला प्रशासन ने किसानों को रियायती दरों पर मिलने वाली यूरिया और डीएपी खाद की कालाबाजारी, जमाखोरी और गैर-कृषि कार्यों में इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए एक सख्त अभियान शुरू किया है। कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि जो भी व्यक्ति या संस्थान उर्वरकों के अवैध भंडारण, डायवर्जन या अधिक कीमत पर बिक्री में लिप्त पाया जाएगा, उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह कदम सरकारी अनुदान का लाभ वास्तविक किसानों तक पहुंचाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार), जिला परिषद भरतपुर राधेश्याम मीणा ने बताया कि राजस्थान सरकार के कृषि आयुक्त द्वारा 4 नवंबर 2026 को जारी निर्देशों के अनुपालन में यह कार्रवाई की जा रही है। केंद्र सरकार किसानों को राहत देने के लिए खाद पर भारी सब्सिडी देती है, लेकिन कुछ औद्योगिक इकाइयां जैसे प्लाईवुड, रेजिन और पशु आहार निर्माता इसका गलत इस्तेमाल कर रहे हैं, जो नियमों का सीधा उल्लंघन है।
आवश्यक वस्तु अधिनियम-1955 के तहत उर्वरकों को आवश्यक वस्तु माना गया है। इस अधिनियम की धारा 7 के अंतर्गत नियमों को तोड़ने पर तीन महीने से लेकर सात साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है। इसके अलावा, धारा 10 के तहत संबंधित संस्थान और जिम्मेदार व्यक्तियों पर भी कानूनी शिकंजा कसा जाएगा। उर्वरकों के अवैध परिवहन में इस्तेमाल होने वाले वाहनों को जब्त करने के भी स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। उर्वरक नियंत्रण आदेश-1985 के तहत कृषि के अलावा अन्य कार्यों में खाद का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है।
प्रशासन ने अब औद्योगिक इकाइयों के लिए पंजीकरण अनिवार्य कर दिया है। इन इकाइयों को हर महीने यूरिया की खरीद और उससे होने वाले उत्पादन का पूरा ब्यौरा स्थानीय कृषि विभाग को देना होगा। विभाग इन गतिविधियों की निरंतर निगरानी करेगा ताकि अनुदानित उर्वरकों का दुरुपयोग रोका जा सके।
संयुक्त निदेशक ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि कोई कृषि अधिकारी इन अवैध गतिविधियों को रोकने में लापरवाही बरतता है, तो उसकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जाएगी। प्रशासन ने किसानों और आम जनता से अपील की है कि वे खाद की कालाबाजारी या अवैध परिवहन की सूचना तुरंत विभाग को दें, ताकि सरकारी अनुदान का लाभ जरूरतमंद किसानों तक सुरक्षित पहुंच सके।


