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सुमेरपुर के निजी अस्पताल में इलाज के दौरान बदसलूकी का वीडियो वायरल, परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप

सुमेरपुर के एक निजी अस्पताल का वीडियो वायरल होने के बाद चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। गर्भवती महिला के परिजनों ने डॉक्टर पर अपमानजनक भाषा के इस्तेमाल का आरोप लगाया है।

सुमेरपुर स्थित एक निजी अस्पताल का दृश्य
सुमेरपुर स्थित एक निजी अस्पताल का दृश्य

सुमेरपुर, पाली। सुमेरपुर के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान हुई एक घटना ने चिकित्सा सेवा की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक वायरल वीडियो के सामने आने के बाद अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टर के व्यवहार को लेकर विवाद गहरा गया है। परिजनों का आरोप है कि जब वे अपनी गर्भवती बहू को ब्लीडिंग की समस्या के चलते अस्पताल लेकर पहुंचे, तो उन्हें इलाज के बजाय अपमान का सामना करना पड़ा। इस घटनाक्रम का वीडियो अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

यह मामला 4 नवंबर का बताया जा रहा है। परिजनों के अनुसार, वे डॉ. अनीता राजपुरोहित से जुड़े निजी अस्पताल में उपचार के लिए पहुंचे थे। महिला की गंभीर स्थिति को देखते हुए परिजन बार-बार डॉक्टर को बुलाने और मरीज की स्थिति जानने का आग्रह कर रहे थे। आरोप है कि उन्हें काफी देर तक इंतजार कराया गया और उनकी चिंताओं को नजरअंदाज किया गया। इसी दौरान अस्पताल में डॉक्टर और परिजनों के बीच तीखी बहस हुई, जो कैमरे में कैद हो गई।

वायरल वीडियो में कथित तौर पर डॉक्टर की आवाज में अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल सुनाई दे रहा है, जिसमें परिजनों को अस्पताल से बाहर निकालने और अभद्र भाषा का प्रयोग करने के आरोप लगाए गए हैं। यदि ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह चिकित्सा पेशे की मर्यादा के लिए एक बड़ा झटका होगा। हालांकि, वीडियो की सत्यता और पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच होना अभी बाकी है, लेकिन इस वीडियो ने मरीजों के प्रति अस्पताल के रवैये पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

परिजनों ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और राजस्थान मेडिकल काउंसिल में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने मांग की है कि अस्पताल के मेडिकल रिकॉर्ड, उपचार प्रक्रिया और डॉक्टर की उपलब्धता की समय सीमा की गहन जांच की जाए। परिवार का कहना है कि वे केवल इलाज नहीं, बल्कि सम्मान के हकदार थे, जो उन्हें नहीं मिला। अब सबकी निगाहें स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं कि क्या वे इस मामले में कोई ठोस कदम उठाएंगे।

इस मामले में डॉ. अनीता राजपुरोहित से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कोई भी बयान देने से इनकार कर दिया। अस्पताल प्रबंधन की ओर से भी अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। चिकित्सा सेवा का आधार केवल दवाइयां नहीं, बल्कि मरीज और उनके परिजनों के साथ संवाद और भरोसा भी है। सुमेरपुर की इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि निजी अस्पतालों में मरीज की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी है।

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