जयपुर। जयपुर पश्चिम पुलिस ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय वित्तीय अपराध सिंडिकेट का खुलासा करते हुए मुख्य आरोपी विकास ढाका को गिरफ्तार किया है। पुलिस उपायुक्त प्रशांत किरण के नेतृत्व में वैशाली नगर थाना और जिला विशेष टीम ने संयुक्त रूप से इस कार्रवाई को अंजाम दिया। जांच में सामने आया है कि यह गिरोह पिछले दो वर्षों से क्रिप्टो करेंसी और हवाला के माध्यम से करीब 24 करोड़ रुपये का अवैध लेनदेन कर रहा था। आरोपी के दुबई स्थित हवाला नेटवर्क से गहरे संबंध होने की पुष्टि हुई है।
पुलिस को मुखबिर के जरिए सूचना मिली थी कि वैशाली नगर की नेमी सागर कॉलोनी में एक फ्लैट से अवैध गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है। थानाधिकारी अरविंद सिंह और डीएसटी प्रभारी गणेश सैनी की टीम ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर दबिश दी और सीकर निवासी विकास ढाका को हिरासत में लिया। आरोपी करीब 20 दिन पहले ही अपने नेटवर्क का विस्तार करने के इरादे से जयपुर आया था, लेकिन पुलिस ने उसके मंसूबों को नाकाम कर दिया।
इस सिंडिकेट का काम करने का तरीका बेहद शातिर था। आरोपी जैसलमेर और सीकर के रिसॉर्ट्स में काम करने वाले गरीब मजदूरों को लालच देकर उनके दस्तावेज हासिल करता था। इन दस्तावेजों का उपयोग करके विभिन्न बैंकों में फर्जी खाते और मर्चेंट क्यूआर कोड बनवाए जाते थे। इन खातों को साइबर ठगों और सट्टेबाजी करने वाले गिरोहों को भारी कमीशन पर बेचा जाता था, जिससे अवैध कमाई को ठिकाने लगाया जा सके।
ठगी और सट्टे से प्राप्त रकम को आरोपी तुरंत यूएसडीटी क्रिप्टो करेंसी में बदल देता था। इसके बाद दुबई के हवाला नेटवर्क के जरिए इस डिजिटल मुद्रा को नकदी में बदलकर भारतीय बाजार में खपाया जाता था। पुलिस ने मौके से नौ मोबाइल फोन, आठ फिनो पेमेंट बैंक के डेबिट कार्ड किट और गूगल पे स्कैनर रोल बरामद किए हैं।
वर्तमान में साइबर सेल की टीम जब्त किए गए मोबाइल फोन का फॉरेंसिक विश्लेषण कर रही है। पुलिस टेलीग्राम चैट, क्रिप्टो वॉलेट और डिजिटल की के जरिए गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान करने में जुटी है। इस कार्रवाई से न केवल फर्जी खातों के नेटवर्क का पता चला है, बल्कि यह भी स्पष्ट हुआ है कि साइबर अपराधी किस तरह से आधुनिक तकनीक का उपयोग कर कानून से बचने की कोशिश कर रहे थे। पुलिस अब इस पूरे मामले की गहनता से जांच कर रही है ताकि सिंडिकेट के सभी विदेशी संपर्कों को बेनकाब किया जा सके।


