हरियाणा में पेड़ पौधों के संरक्षण को लेकर सरकार द्वारा नया कानून लेकर आ रही है। नए कानून में सार्वजनिक स्थल ही नहीं बल्कि निजी प्रापर्टी से पेड़ भी नहीं काट सकेंगे। अगर घर, प्लाट व खेत में खड़ा पेड़ भी काट दिया तो उसके लिए जुर्माना व सजा दोनों का प्रावधान होगा। हरियाणा वृक्ष संरक्षण अधिनियम 2026 का मसौदा तैयार कर लिया गया है। वन मंत्री की अध्यक्षता में संशोधनों के बाद इसे कानूनी जांच के लिए भेजा जा रहा है, जिसके बाद इसे जनता के सुझावों के लिए रखा जाएगा और फिर विधानसभा में पारित कर लागू किया जाएगा।
पेड़ काटने पर होगा कठोर कानून
हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में दायर याचिका में बताया कि प्रदेश में पेड़ पौधों को लेकर सख्त कानून बनाया जा रहा है। फिलहाल पंजाब भूमि संरक्षण अधिनियम (पीएलपीए), 1900 की धारा 4 के अंतर्गत न आने वाली निजी भूमि पर पेड़ों की कटाई को लेकर कोई कानून नहीं है।
कानून लागू होने के बाद हरियाणा के नगर निगम या शहरी सीमा के भीतर कोई भी व्यक्ति अपने घर, आंगन या खरीदे हुए निजी प्लाट में लगे पेड़ को नहीं काट सकेगा। इसके लिए भी जमीन के मालिक को ट्री ऑफिसर से विधिवत अनुमति लेनी होगी। जिला वन अधिकारी ही ट्री ऑफिसर होंगे।
30 सेंटीमीटर टहनी काटी तो भी होगा जुर्माना
हरियाणा में ड्राफ्ट किए गए नए कानून में सख्त बनाया गया है। इसमें 30 सेंटीमीटर या उससे अधिक मोटाई वाली शाखाओं को काटना, छांटना भी पेड़ काटने की श्रेणी में आएगा। किसी पेड़ को कंक्रीट से ढंकना, रसायन डालना या जलाना, जिससे वह सूख जाए, उसे भी कानूनी अपराध माना जाएगा। पेड़ काटने की अनुमति के लिए हरियाणा ई-सेवा पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा, जिस पर ट्री ऑफिसर 30 दिन के भीतर निर्णय लेगा। निजी कृषि खेतों में पेड़ों की सामान्य छंटाई या पूरी तरह से सूख चुके मृत पेड़ों को हटाने के लिए किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी।
प्रत्येक पेड़ के हिसाब से दस हजार होगा जुर्माना
नए कानून के ड्राफ्ट के अनुसार यदि किसी व्यक्ति या संस्था को किसी ठोस कारण से एक हरा पेड़ काटने की अनुमति मिलती है, तो उसे पर्यावरण के नुकसान की भरपाई के लिए वन विभाग के माध्यम से उसी जिले में 10 पौधे लगाने होंगे। आवेदक को इन 10 नए पेड़ों के 5 वर्षों तक रखरखाव के लिए कुल लागत के बराबर राशि कोष में अग्रिम जमा करानी होगी।
बिना अनुमति हरा पेड़ काटने पर प्रति पेड़ 10,000 रुपए का जुर्माना लगेगा। जुर्माने के साथ-साथ 5 वर्षों के लिए पौधारोपण और रखरखाव की लागत का 20 गुना पर्यावरणीय मुआवजा भी देना होगा। जुर्माना राशि जमा न करने पर न्यूनतम 3 महीने की जेल का प्रावधान किया गया है।
अवैध कटाई में इस्तेमाल किए गए औजारों और वाहनों को वन विभाग द्वारा तुरंत जब्त कर लिया जाएगा। यदि कोई संस्था या कंपनी यह अपराध करती है, तो उसके मैनेजर या निदेशक को सीधे तौर पर दोषी माना जाएगा।