Delhi-Gurugram Expressway : दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे से निकलने वाले लाखों वाहनों के शोर को रोकने के लिए एनएचएआई साइलेंट टेक्नोलॉजी का प्रयोग करेगी। साइलेंट टेक्नोलॉजी का प्रयोग होने से एक्सप्रेसवे से निकलने वाले वाहनों का शोर बाहर कम सुनाई देगा और इसके आसपास रहने वाले लाखों लोगों को राहत मिलने वाली है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) एक्सप्रेसवे के दोनों ओर नइज बैरियर लगाने की योजना बनाई है।
अगले एक महीने में इनकी स्थापना पर आने वाले खर्च का आंकलन किया जाएगा। फिर योजना को धरातल पर उतारने की दिशा में कदम बढ़ाए जाएंगे। द्वारका एक्सप्रेसवे की तर्ज पर विकसित होने वाली इस व्यवस्था से यातायात की आवाज को रिहायशी क्षेत्रों तक पहुंचने से रोकने में मदद मिलेगी।
दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के सबसे व्यस्त मार्गों में शामिल है। दिल्ली और गुरुग्राम के बीच दिनभर बड़ी संख्या में वाहनों की आवाजाही रहती है। वाहनों के इंजन, हार्न और टायरों से पैदा होने वाला शोर आसपास की आवासीय सोसायटियों और रिहायशी इलाकों में राहने वाले लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है।
लगातार शोर के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने के साथ रात में लोगों की नींद में भी खलल पड़ता है। यातायात का दबाव बढ़ने के साथ यह समस्या और गंभीर होती जा रही है। इसे देखते हुए एक्सप्रेसवे के आसपास रहने वाले लोग लंबे समय से वाहनों के शोर से राहत दिलाने के लिए प्रभावी व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।
सेक्टर-15 पार्ट-दो के रहने वाले सेवानिवृत्त इंजीनियर विमल वर्मा का कहना है कि एक्सप्रेसवे पर दिन-प्रतिदिन यातायात का दबाव बढ़ रहा है। जाम की समस्या के बीच वाहनों का शोर भी लगातार बढ़ रहा है। नाइज बैरियर सड़क और रिहायशी क्षेत्र के बीच ध्वनि अवरोधक का काम करते हैं। इनकी ऊंचाई, बनावट, सामग्री और स्थापना के स्थान के आधार पर वाहनों की आवाज को काफी हद तक कम किया जा सकता है। अनुकूल परिस्थितियों में अच्छी गुणवत्ता वाले नाइज बैरियर यातायात के शोर को 15 से 20 डेसिबल तक घटाने में सक्षम हो सकते हैं।
नाइज बैरियर से लोगों को होगा लाभ
हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से सेवानिवृत्त वरिष्ठ विज्ञानी उमाशंकर शर्मा कहते हैं कि नाइज बैरियर या ध्वनि अवरोधक एक ऐसी बाहरी संरचना होती है जिसे मुख्य रूप से वाहनों, हाईवे, रेलवे या निर्माण स्थलों के शोर को रिहायशी इलाकों, अस्पतालों या स्कूलों तक पहुंचने से रोकने के लिए लगाया जाता है। यह आमतौर पर कंक्रीट, धातु (एल्युमीनियम/स्टील), पालीकार्बोनेट (पारदर्शी शीट) से बनाए जाते है।
सामान्य और अच्छी गुणवत्ता वाले नाइज बैरियर 20 से 25 डेसिबल (डीबी) तक शोर कम करने की क्षमता रखते हैं। हाईवे या एक्सप्रेसवे के किनारे वाहनों की आवाजाही और टायरों के घिसने से शोर का स्तर 70 से 85 डेसिबल या उससे भी अधिक पहुंच जाता है। रिहायशी इलाको में सुबह बजे से रात 10 बजे तक अधिकतम 55 डेसिबल एवं रात दस से सुबह छह तक अधिकतर 45 डेसिबल रहना चाहिए।
द्वारका एक्सप्रेसवे पर प्रयोग की जा रही टेक्नोलॉजी
द्वारका एक्सप्रेसवे पर नाइज बैरियर की व्यवस्था की गई है। इससे आसपास के इलाकों तक वाहनों की आवाज बहुत कम पहुंचती है। एनएचएआइ के परियोजना निदेशक भवनेश कुमार का कहना है कि दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे के दोनों ओर नाइज बैरियर लगाने की दिशा में काम किया जाएगा। अगले एक महीने में इस पर होने वाले खर्च का आकलन किया जाएगा।
इसके बाद आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। इसका उद्देश्य सड़क से निकलने वाली आवाज का आसपास के रिहायशी क्षेत्रों पर पड़ने वाला प्रभाव कम करना है। इस योजना पर काम करने से पहले कोई सर्वे नहीं किया गया है। कुछ कार्यों के लिए सर्वे की आवश्यकता नहीं होती। एक्सप्रेसवे पर वाहनों का दबाव बढ़ रहा है। इसकी वजह से वाहनों का शोर बढ़ रहा है, इसे महसूस करते हुए योजना पर काम किया जाएगा।
अनिल चौधरी को विभिन्न मीडिया संस्थानों में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत (हरिभूमि हिंदी समाचार पत्र) से प्रिंट मीडिया में की, जहां खबरों की बुनियादी समझ और लेखन की गंभीरता सीखी। इसके बाद उन्होंने अमर उजाला (हिंदी समाचार पत्र) में 7 वर्षों तक कार्य किया। अनिल कुमार की बिजनेस, मनोरंजन, सरकारी योजनाएं और रेलवे से संबंधित खबरों पर मजबूत पकड़ है। वर्तमान में अनिल कुमार डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपनी सेवाएं दे रहे हैं।