राजस्थान के किसानों पर फसल खराब होने पर बैंक का कर्ज बढ़ गया है और अब किसानों के ऊपर जमीन कुर्क होने का खतरा मंडरा रहा है। रायसिंहनगर में सिंचाई पानी की कमी और बारिश के अभाव में फसल नहीं होने से कई किसान बैंक की किस्तें चुकाने में असमर्थ है। कर्जमाफी की उम्मीद के बीच ऐसे किसानों की संख्या बढ़ रही है, जो बैंकों के डिफाल्टर हो चुके हैं। बैंक अधिकारियों के अनुसार ऋण चुकाने में असमर्थ किसानों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उपखंड कार्यालय में विभिन्न बैंकों के राको रोडा एक्ट के तहत 3000 से अधिक प्रकरण लंबित है। इन मामलों में किसानों को कर्ज वसूली के साथ अपनी जमीन कुर्क और नीलाम होने का डर सता रहा है।
पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने किसानों की जमीनों की नीलामी पर रोक लगाते हुए प्राकृतिक एवं अन्य आपदाओं से प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए अगस्त 2023 में सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रकाशचंद गुप्ता की अध्यक्षता में राजस्थान राज्य कृषक ऋण राहत आयोग विधेयक 2023 पारित किया था। इसके बावजूद किसानों की कर्ज संबंधी मुश्किलें बनी हुई है।
क्या है राको-रोडा एक्ट?
राजस्थान में कृषि ऋण वसूली के लिए 1956 का कृषि ऋण अधिनियम प्रभावी नहीं रहने पर 21 सितंबर 1974 को राजस्थान कृषि ऋण संक्रिया अधिनियम-1974 लागू किया गया। इसे 10 मार्च 1976 को और प्रभावी बनाया गया। आम भाषा में इसे राको रोडा या रोडा एक्ट कहा जाता है। इसके तहत बैंक उपखंड अधिकारी या तहसीलदार के माध्यम से किसान की जमीन कुर्क कर ऋण वसूली की कार्रवाई कर सकते हैं।
बड़े कर्जदारों के मामले डीआरटी में
किसानों की मुश्किलें केवल राको रोडा एक्ट तक सीमित नहीं है। 20 लाख रुपए से अधिक के बकाया ऋण की वसूली के लिए बैंक डेट रिकवरी ट्रिब्यूनल (डीआरटी) का सहारा भी ले रहे हैं। डीआरटी को संपत्ति कुर्क करने और उसकी बिक्री के आदेश देने का अधिकार है। इसमें संपत्ति की ऑनलाइन नीलामी का भी प्रावधान है। बड़े कृषि ऋण और एग्री बिजनेस से जुड़े डिफाल्टरों के मामले भी डीआरटी तक पहुंच रहे हैं।
रायसिंहनगर के बैंक अधिवक्ता एडवोकेट उमेशकांत सोनी ने बताया कि कर्ज चुकाने में असमर्थ किसान बैंक के नोटिस को नजरअंदाज न करें। पहला नोटिस मिलते ही बैंक शाखा में जाकर समस्या लिखित में बताएं और पत्राचार व भुगतान की रसीदें संभालकर रखें। अंतिम नोटिस के एक माह बाद भी भुगतान नहीं होने पर बैंक उपखंड अधिकारी से वसूली की कार्रवाई का आग्रह कर सकता है। समय रहते संवाद से कार्रवाई रोकी जा सकती है।


