New Railway Line Rajasthan : राजस्थान के लोगों को हरियाणा से होते हुए दिल्ली का सफर आसान बनने के लिए नई रेल लाइन को सर्वे का इंतजार है। उत्तर-पश्चिम राजस्थान में दो प्रमुख रेल कॉरिडोर के बीच करीब 110 किलोमीटर की दूरी अब भी कनेक्टिविटी के लिए भी प्रमुख है।
सूरतगढ़ से पल्लू और सरदारशहर होते हुए रतनगढ़ तक नई रेल लाइन बिछाने की मांग दशकों से उठ रही है। इससे बीकानेर-बठिंडा और बीकानेर रतनगढ़-रेवाड़ी रेल मार्ग सीधे जुड़ सकेंगे। साथ ही दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा तक पहुंचने के लिए छोटा वैकल्पिक मार्ग मिल सकता है। इसके बावजूद प्रस्ताव अब तक प्राथमिक सर्वे की स्वीकृति तक नहीं पहुंच पाया है।
दो प्रमुख रेल कॉरिडोर के बीच सीधा जुड़ाव
प्रस्तावित रेल लाइन का महत्व सूरतगढ़ और रतनगढ़ के बीच सीधा रेल संपर्क स्थापित करने के साथ पूरे क्षेत्र के रेल नेटवर्क को जोड़ने में है। वर्तमान में सूरतगढ़ से रतनगढ़ जाने के लिए यात्रियों को बीकानेर होकर लंबा चक्कर लगाना पड़ता है। नई लाइन बनने से दूरी कम होगी और दिल्ली-एनसीआर व हरियाणा की ओर जाने के लिए भी वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होगा।
माल परिवहन को मिलेगा नया विकल्प
नई रेल लाइन किसानों और उद्योगों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकती है। इससे सूरतगढ़ सुपर थर्मल परियोजना तक कोयले की आपूर्ति के लिए वैकल्पिक मार्ग मिलेगा। वहीं कृषि उपज और औद्योगिक सामग्री की ढुलाई क गति मिल सकती है। रतनगढ़ से चूरू होते हुए रेवाड़ी तक मौजूदा रेल संपर्क के जरिए इस मार्ग को पश्चिमी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से जोड़ने की संभावना भी बनेगी। इससे क्षेत्र के कृषि और औद्योगिक कारोबार को देश के प्रमुख माल परिवहन नेटवर्क तक पहुंच का अतिरिक्त विकल्प मिल सकेगा।
सर्वे की स्वीकृति का इंतजार
इस रेल लाइन की मांग को लेकर सीमावर्ती जिलों के लोग और रेल संघर्ष समितियां कई बार ज्ञापन दे चुकी हैं। उत्तर-पश्चिम रेलवे के अधिकारियों से सर्वे करवाने और परियोजना की व्यवहार्यता जांचने का आग्रह भी किया गया है। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है। यात्री सुविधा, माल परिवहन, औद्योगिक विकास और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही यह परियोजना रेलवे की प्राथमिकताओं में जगह पाने का इंतजार कर रही है।


