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ट्रेन की स्पीड नहीं, इस आधार पर मिलती है सुपरफास्ट ट्रेन की पहचान, रेलवे का असली नियम जानिए

ट्रेन की स्पीड नहीं, इस आधार पर मिलती है सुपरफास्ट ट्रेन की पहचान, रेलवे का असली नियम जानिए

Railway Rules : भारतीय रेलवे ने ट्रेनों की अलग-अलग कैटगिरी बनती है। अक्सर लोग ट्रेन की ज्यादा स्पीड को ही सुपरफास्ट मान लेते है, लेकिन रेलवे विभाग यह नियम नहीं अपनाता है। रेलवे में सुपरफास्ट, मेल, एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनों का वर्गीकरण निर्धारित मानकों के आधार पर किया जाता है। अक्सर यात्री मानते हैं कि 110 या 130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली ट्रेन सुपरफास्ट होती है, लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है।

रेलवे में किसी ट्रेन को सुपरफास्ट घोषित करने के लिए उसकी अधिकतम गति के बजाय निर्धारित औसत गति को आधार बनाया जाता है। रेलवे के मानदंडों के अनुसार ब्रॉडगेज पर चलने वाली ट्रेन की औसत गति दोनों दिशाओं में कम से कम 55 किमी प्रति घंटा होनी चाहिए। इसमें रास्ते के स्टेशनों पर होने वाले ठहराव का समय भी शामिल रहता है।

उदाहरण के तौर पर कोई ट्रेन 600 किमी की दूरी 10 घंटे में तय करती है तो उसकी औसत गति 60 किमी प्रति घंटा होगी। वहीं, यही दूरी 12 घंटे में में तय करने पर औसत गति 50 किमी प्रति घंटा रह जाएगी। ऐसी ट्रेन सुपरफास्ट का गति मानदंड पूरा नहीं करेगी।

सुपरफास्ट में लगता है अतिरिक्त किराया सुपरफास्ट ट्रेनों में सामान्य मेल एक्सप्रेस किराए के अतिरिक्त निर्धारित सुपरफास्ट अधिभार भी लिया जाता है। यह राशि यात्रा की श्रेणी के अनुसार अलग अलग होती है। रेलवे समय-समय पर ट्रेनों की श्रेणी और नंबर में बदलाव भी करता है। दक्षिण रेलवे की अक्टूबर 2026 की अधिसूचना के अनुसार कुछ सुपरफास्ट ट्रेनों को जनवरी 2027 से मेल एक्सप्रेस श्रेणी में बदलने का निर्णय लिया गया है। इनमें ट्रेन संख्या 22113 को 11073 व 22114 को 11074 किया जाएगा।

ट्रेन नंबर से भी पहचान

सीनियर डीसीएम सौरभ जैन के अनुसार भारतीय रेलवे में 20 दिसंबर 2010 से यात्री ट्रेनों के लिए पांच अंकों की नंबरिंग व्यवस्था लागू की गई थी। इसमें पहले अंक से ट्रेन की श्रेणी का संकेत मिलता है। सामान्य तौर पर शून्य से शुरू होने वाले नंबर विशेष ट्रेनों, एक और दो से शुरू होने वाले नंबर लंबी दूरी की मेल-एक्सप्रेस व सुपरफास्ट ट्रेनों के लिए इस्तेमाल होते हैं।

तीन और चार की सीरीज उपनगरीय ईएमयू, पांच पैसेंजर, छह मेमू, सात डेमू और नौ मुंबई की उपनगरीय रेल सेवाओं से जुड़ी रही है। हालांकि दो से शुरू होने वाली हर ट्रेन सुपरफास्ट नहीं होती और एक से शुरू होने वाले नंबरों पर भी सुपरफास्ट ट्रेनें संचालित होती हैं।

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