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मेवाड़ के जंगालों का ‘हरा सोना’ अब किसानों तक पहुंचेगा, बढ़ेगी आय और हरियाली

मेवाड़ के जंगालों का ‘हरा सोना’ अब किसानों तक पहुंचेगा, बढ़ेगी आय और हरियाली

Rajasthan Bamboo Production : मेवाड़ के किसानों का आय का स्त्रोत बढ़ने वाला है। अब किसानों की आय को हरा सोना द्वारा बढ़ाई जाएगी। मेवाड़ की उपजाऊ मिट्टी और अनुकूल भौगोलिक परिस्थितियां अब जंगलों में बांस (हरा सोना) की पैदावार को नई पहचान दे रही है। यहां के जंगलों में 20 से 25 फीट तक लंबे बांस तैयार हो रहे हैं।

जंगलों से निकलने वाला यह बांस केवल स्थानीय जरूरतों तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वरूपगंज में नीलामी के जरिये राजस्थान के दूसरे क्षेत्रों और देश के अन्य राज्यों तक पहुंच रहा है। बांस उत्पादन से वन विभाग को हर साल लाखों का राजस्व भी मिल रहा है। अब वन विभाग इस प्राकृतिक संपदा को जंगलों तक सीमित रखने के बजाय आदिवासी किसानों और आम लोगों की निजी जमीन तक पहुंचाने की तैयारी में है।

इसके तहत वनभूमि के आसपास रहने वाले आदिवासियों के साथ ही अन्य किसानों और निजी भूमि मालिकों को भी बांस की खेती के लिए जागरूक किया जाएगा। उन्हें स्थानीय जलवायु के अनुकूल अच्छी किस्मों के पौधे उपलब्ध करवाए जाएंगे, ताकि बांस उत्पादन बढ़ने के साथ लोगों की आय के नए रास्ते भी खुल सकें। वन मंडल उदयपुर की विभिन्न नर्सरियों में बांस की अलग-अलग प्रजातियों के पौधे तैयार किए गए है। अब इन पौधों को वनभूमि के अलावा सरकारी और निजी भूमि पर भी लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

ट्री आउट‌साइड फॉरेस्ट से बढ़ेगा हरित क्षेत्र

वन विभाग की योजना केवल जंगलों में पौधरोपण तक सीमित नहीं है। ट्री आउटसाइड फॉरेस्ट यानी वन क्षेत्र के बाहर हरियाली बढ़ाने की मुहिम के तहत सरकारी और निजी भूमि पर भी पौधे लगाने को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके लिए वन विभाग की नर्सरियों में स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल पौधे तैयार किए जा रहे हैं।

इनमें बांस की विभिन्न प्रजातियां भी शामिल है। इस पहल के तहत किसानों को ऐसे पौधे उपलब्ध करवाने पर जोर रहेगा, जो स्थानीय मिट्टी और जलवायु में अच्छी वृद्धि कर सकें। बांस की खासियत यह है कि इसकी उपयोगिता कई क्षेत्रों में है। निर्माण कार्यों, फर्नीचर, हस्तशिल्प और विभिन्न औद्योगिक उत्पादों में इसका इस्तेमाल होता है।

उत्तर मंडल उपवन संरक्षक डीके तिवारी ने कहा कि उदयपुर की परिस्थितियां और मिट्टी बांस की खेती के लिए अनुकूल हैं। यहां जंगलों में बांस की अच्छी पैदावार हो रही है और 20 से 25 फीट तक लंबे बांस तैयार हो रहे हैं। नर्सरियों में बांस के पौधे तैयार किए जा रहे हैं। अब वनभूमि के अलावा सरकारी और निजी भूमि पर भी खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा।

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