Haryana New Audit Law : हरियाणा सरकार विकास कार्यों के फंड में गड़बड़ी को रोकने के लिए सख्त हो गई है। इसके लिए हरियाणा सरकार द्वारा बड़ा फैसला लिया गया है कि प्रदेश की सभी नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पालिकाओं से लेकर जिला परिषदों, ग्राम पंचायत समितियों और पंचायतों के वित्तीय लेन-देन पर सख्त नजर रहेगी और अब इनका आडिट किया जाएगा।
इसके अलावा हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड, राज्य विश्वविद्यालयों, चौधरी चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय, महाराजा अग्रसेन चिकित्सा महाविद्यालय, इंजीनियरिंग व मेडिकल कालेजों सहित सरकारी सहायता प्राप्त सभी शैक्षणिक संस्थाओं का आडिट कराया जाएगा। खर्च में गड़बड़ी मिलने, धन के दुरुपयोग, अनधिकृत भुगतान या लापरवाही सामने आने पर संबंधित अधिकारियों से वसूली की जाएगी।
सरकारी धन के इस्तेमाल में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और वित्तीय अनियमितताओं पर अंकुश लगाने के लिए प्रदेश सरकार ने स्थानीय लेखा परीक्षा अधिनियम 2026 लागू कर दिया है। नए कानून के तहत वित्तीय वर्ष के समाप्त होने के तीन महीने के भीतर खातों का आडिट कराना होगा।
आडिट के लिए खाते प्रस्तुत नहीं करने पर फंड रोके जा सकते हैं। लेखा परीक्षा अधिकारी को वार्षिक, द्विवार्षिक अथवा आवश्यकतानुसार कभी भी आडिट करने का अधिकार होगा। वे संबंधित संस्था से वाउचर, विवरण, पत्राचार, टिप्पणियां और इलेक्ट्रानिक रिकार्ड सहित जरूरी दस्तावेज मांगने के साथ ही संबंधित व्यक्ति को व्यक्तिगत रूप से तलब कर सकते हैं।
रिकार्ड उपलब्ध नहीं कराने या उपस्थित नहीं होने पर पांच हजार रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकेगा। हालांकि जुर्माना लगाने से पहले कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए जवाब के लिए 15 दिन का समय दिया जाएगा। समय में पर न्याय संगत जवाब नहीं मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
आडिट रिपोर्ट में गड़बड़ी और जिम्मेदारों के नाम होंगे दर्ज
आडिट के बाद निदेशक संबंधित कार्यकारी अधिकारी को रिपोर्ट भेजेंगे। नियमों के विपरीत किए गए भुगतान, अधिकारियों की लापरवाही या कदाचार से हुई वितीय हानि, फंड के दुरुपयोग, खातों में दर्ज नहीं की गई प्राप्तियों और अन्य अनियमितताओं का उल्लेख किया जाएगा। रिपोर्ट मिलने के बाद कार्यकारी अधिकारी को दो महीने के भीतर कमियों और अनियमितताओं को दूर करना होगा।
यदि निदेशक को लगता है कि आडिट में बताई गई कमियों को दूर नहीं किया गया है तो वे अगले दो महीने के भीतर आदेश पारित करेंगे। इसमें यह तय किया जाएगा कि अनियमितता को किस तरीके से नियमित किया जा सकता है, उसे माफ किया जा सकता है या संबंधित राशि किस व्यक्ति से वसूल की जानी चाहिए।
गंभीर मामलों में विशेष आडिट
लापरवाही या कदाचार के कारण हुई वित्तीय हानि अथवा खाते में दर्ज नहीं की गई राशि की वसूली जिम्मेदार व्यक्ति से की जाएगी। हालांकि जुर्माने से असतुष्ट व्यक्ति एक महीने के भीतर वित्त विभाग के प्रशासनिक सचिव के समक्ष आवेदन कर सकेगा। प्रशासनिक सचिव अधिभार को जारी रखने, संशोधन करने या माफ करने का निर्णय ले सकते हैं।
निर्धारित राशि एक महीने के भीतर जमा नहीं करने पर उसे भू-राजस्व के बकाये की तरह वसूला जा सकेगा। गबन, चोरी, प्राकृतिक आपदा से नुकसान या अन्य वित्तीय हानि का पता चलने पर संबंधित प्राधिकरण को तत्काल निदेशक को रिपोर्ट देनी होगी। ऐसी रिपोर्ट मिलने पर निदेशक तुरंत विशेष लेखा-परीक्षा करा सकेंगे। गबन के मामलो में आपराधिक कार्रवाई का रास्ता खुला रहेगा। निदेशक द्वारा तैयार की गई समेकित लेखा परीक्षा रिपोर्ट सरकार को भेजी जाएगी, जिसे विधानसभा में रखा जाएगा।