हरियाणा में पेपर लीक मामले में सक्रिय गिरोह पर लगाम लगाने के लिए सरकार द्वारा सख्त कानून बनाया गया है। अब ऐसे लोगों को कानून के शिकंजे में लेने के लिए कड़ा प्रावधान किया है, ताकि एक बार वह कानून के जाल में फंस गया तो बाहर निकलना मुश्किल हो जाएगा। केंद्र सरकार की ओर से लागू किए गए 'दी पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन आफ अनफेयर मींस) अमेंडमेंट एक्ट 2026' के प्रविधानों को हरियाणा में भी लागू कर दिया गया है।
नए कानून के तहत पेपर लीक करने, परीक्षा में अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने और फर्जी एडमिट कार्ड या वेबसाइट तैयार करने वालों को अधिकतम 10 साल तक की जेल और 50 लाख रुपये तक के जुर्माने का सामना करना पड़ेगा। किसी संगठित गिरोह या संस्थान की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ 10 साल तक की कैद और कम से कम 10 करोड़ रुपये के जुर्माने का प्रविधान किया है।
उच्च शिक्षा विभाग ने इस संबंध में प्रदेशभर के सरकारी शिक्षण संस्थानों और संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। उच्च शिक्षा महानिदेशक एस नारायणन की ओर से शुक्रवार को जारी परिपत्र में सभी संबंधित अधिकारियों को नए कानून के प्रविधानों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। परिपत्र मुख्यमंत्री कार्यालय से प्राप्त निर्देशों के आधार पर जारी किया गया है।
निर्देशों के तहत प्रदेश के सभी सरकारी कालेजों के प्राचार्यों, एनसीसी यूनिट्स के कमांडिंग अफसरों व जिला एवं उपमंडल पुस्तकालयों के अध्यक्षों को कानून की जानकारी संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों तक पहुंचाने के साथ इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कहा गया है।
नए प्रविधानों का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना तथा पेपर लीक के माध्यम से युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले लोगों पर प्रभावी कार्रवाई करना है। इन प्रविधानों को लागू किए जाने के बाद अब उच्च शिक्षा विभाग के अधीन आने वाले सरकारी शिक्षण संस्थानों और संबंधित इकाइयों को भी परीक्षा संबंधी गतिविधियों में निर्धारित नियमों का सख्ती से पालन करना होगा।
संगठित गिरोहों और परीक्षा एजेंसियों पर भी कड़ी कार्रवाई
नए कानून में केवल पेपर लीक करने वाले व्यक्ति ही नहीं, बल्कि इसके पीछे काम करने वाले संगठित नेटवर्क, संस्थानों और परीक्षा आयोजित करने वाली निजी एजेंसियों को भी कठोर दंड के दायरे में रखा गया है। यदि कोई संगठित गिरोह या संस्थान परीक्षा में धांधली, पेपर लीक अथवा अन्य अनुचित गतिविधियों में संलिप्त पाया जाता है तो उसके सदस्यों को न्यूनतम सात साल से अधिकतम 10 साल तक की जेल हो सकती है। इसके अलावा ऐसे मामलों में कम से कम 10 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाने का प्रविधान है।
संगठित गिरोहों और परीक्षा एजेंसियों पर भी कड़ी कार्रवाई
नए कानून में केवल पेपर लीक करने वाले व्यक्ति ही नहीं, बल्कि इसके पीछे काम करने वाले संगठित नेटवर्क, संस्थानों और परीक्षा आयोजित करने वाली निजी एजेंसियों को भी कठोर दंड के दायरे में रखा गया है। यदि कोई संगठित गिरोह या संस्थान परीक्षा में धांधली, पेपर लीक अथवा अन्य अनुचित गतिविधियों में संलिप्त पाया जाता है तो उसके सदस्यों को न्यूनतम सात साल से अधिकतम 10 साल तक की जेल हो सकती है। इसके अलावा ऐसे मामलों में कम से कम 10 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाने का प्रविधान है।
जांच और सुनवाई के लिए तय की गई समयसीमा
पेपर लीक और परीक्षा में धांधली के मामलों में अक्सर जांच और कानूनी कार्रवाई लंबी चलने की शिकायतें सामने आती रही हैं। इसके तहत पुलिस, केंद्रीय जांच एजेंसियों और विशेष जांच दल (एसटीएफ) को ऐसे मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी।
विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों का गठन भी संभव
मामलों की त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार और हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की सलाह से विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों का गठन किया जाएगा। इन अदालतों में पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितताओं से जुड़े मामलों की सुनवाई रोजाना के आधार पर होगी। कानून में आरोप पत्र दाखिल होने के तीन महीने के भीतर मुकदमे का निपटारा करने का प्रविधान है।
अनिल चौधरी को विभिन्न मीडिया संस्थानों में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत (हरिभूमि हिंदी समाचार पत्र) से प्रिंट मीडिया में की, जहां खबरों की बुनियादी समझ और लेखन की गंभीरता सीखी। इसके बाद उन्होंने अमर उजाला (हिंदी समाचार पत्र) में 7 वर्षों तक कार्य किया। अनिल कुमार की बिजनेस, मनोरंजन, सरकारी योजनाएं और रेलवे से संबंधित खबरों पर मजबूत पकड़ है। वर्तमान में अनिल कुमार डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपनी सेवाएं दे रहे हैं।