राजस्थान में मुख्यमंत्री जन आवास योजना में सरकार ने नए नियम बना दिए है। सरकार की तरफ से आदेश जारी किए है कि मुख्यमंत्री जन आवास योजना के बिल्डर को सख्ती से पालन करना होगा, नहीं तो सरकार की तरफ से बिल्डर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने नियम निर्धारित किया है अब बिल्डर सिर्फ प्लॉट नहीं, मकान बनाकर देंगे।
इसके लिए सरकार की तरफ से मुख्यमंत्री जन आवास योजना के ड्राफ्ट में निजी डवलपर्स के लिए नया प्रावधान जोड़ा गया है। योजना के मॉडल 3बी के तहत ईडब्ल्यूएस और एलआइजी श्रेणी के भू-खंड विकसित कर केवल बेचने की अनुमति नहीं होगी, बल्कि बिल्डरों को इन पर मकान बनाकर ही आवंटन करना होगा। यह प्रावधान न्यूनतम एक हेक्टेयर जमीन पर लागू होगा।
नए नियम के तहत आवासीय बिक्री योग्य जमीन का न्यूनतम 60 प्रतिशत हिस्सा जरूरतमंदों के लिए रखना होगा। इसमें से भी कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सा ईडब्ल्यूएस श्रेणी के लिए आरक्षित होगा। इस हिस्से में सभी भू-खंडों पर मकान निर्माण अनिवार्य करना प्रस्तावित किया गया है।
पति-पत्नी के संयुक्त नाम पर ही होंगे आवंटित
ड्राफ्ट में ईडब्ल्यूएस और एलआइजी श्रेणी के मकानों, फ्लैट और भू-खंडों के आवंटन में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रावधान किया गया है। इसके तहत भविष्य में इन श्रेणियों के आवास परिवार की वयस्क महिला सदस्य के नाम या पति-पत्नी के संयुक्त नाम पर ही आवंटित किए जाएंगे।
हालांकि, परिवार में कोई वयस्क महिला सदस्य नहीं होने की स्थिति में ही पुरुष सदस्य के नाम आवंटन किया जा सकेगा। प्रोजेक्ट में बुनियादी सुविधाओं के विकास की जिम्मेदारी बिल्डर-डवलपर्स की ही रहेगी। पानी, सीवरेज, ड्रेनेज, बिजली, टेलीफोन, सड़क और पौधारोपण सहित सभी आंतरिक विकास कार्य कराएंगे। आवंटन राशि के अलावा इसमें डवलपमेंट चार्ज नहीं लिए जाएंगे।


