रेलवे विभाग ने धूंध के चलते लेट होने वाली ट्रेनों को लेकर जल्द ही बड़ा फैसला लेने वाला है। इन ट्रेनों के लेट होते ही रेलवे विभाग इन पर कैंची चलाने की तैयारी में है। हर साल धुंध और कोहरे के कारण रेल यातायात बुरी तरह प्रभावित होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए रेलवे बोर्ड इस बार पहले से ही एक्शन प्लान तैयार कर रहा है।
इसके तहत पिछले शीतकालीन मौसम में कोहरे से सबसे ज्यादा प्रभावित रहने वाली ट्रेनों का विस्तृत ब्योरा और डेटा मांगा गया है। इसके दायरे में उन ट्रेनों को प्राथमिकता के आधार पर शामिल किया जाएगा। जो पिछले साल कोहरे के दौरान अधिकतर दिनों में अपने निर्धारित समय से 4 घंटे या उससे अधिक देरी से चली थीं। क्योंकि कोहरे के दौरान ट्रेनों के अधिक लेट होने से रेल संचालन का गणित बिगड़ता है। साथ ही स्टेशनों पर यात्रियों की भारी भीड़ जमा हो जाती है।
लंबी दूरी की ट्रेनें जब 10 से 20 घंटे तक लेट होती हैं तो उनका रैक समय पर उपलब्ध नहीं हो पाता। जिससे अगले दिन की ट्रेनें भी री-शेड्यूल या रद्द करनी पड़ती हैं। इसी अव्यवस्था से बचने के लिए रेलवे इस बार आगे की रणनीति बना रहा है। रेल संचालन को सुरक्षित बनाने के लिए लोको पायलटों को फॉग सेफ डिवाइस दिए जा रहे हैं।
यह जीपीएस आधारित उपकरण ड्राइवर को आने वाले सिग्नल और क्रासिंग की पूर्व सूचना देता है। हालांकि, डेटा के आधार पर होंगे ये फैसले अत्यधिक लेट होने वाली ट्रेनों का रूट छोटा किया जा सकता है। जैसे कि यदि कोई ट्रेन दिल्ली से बिहार, बंगाल तक जाती है और रास्ते में अत्यधिक कोहरा है तो उसे बीच के किसी प्रमुख स्टेशन तक ही चलाया जा सकता है।
रोजाना चलने वाली कुछ ट्रेनों के फेरे घटाए जा सकते हैं। सप्ताह में 7 दिन चलने वाली ट्रेन को 3 या 4 दिन ही चलाया जाएगा ताकि रैक का जिन रूटों पर कोहरा सबसे घना रहता है और जहां अन्य वैकल्पिक ट्रेनें उपलब्ध हैं, वहां कम प्राथमिकता वाली या अत्यधिक प्रभावित ट्रेनों को दिसंबर से फरवरी के लिए पूरी तरह रद्द किया जा सकता है।
घने कोहरे में दृश्यता शून्य के करीब पहुंचने पर संरक्षा नियमों के तहत ट्रेनों की अधिकतम गति 60 से 75 किमी प्रति घंटा तय कर दी जाती है। जिससे ट्रेनें लेट होना स्वाभाविक हो जाता है।
रेलवे जनसंपर्क अधिकारी जयशंकर ने बताया कि रेलवे के इस कदम से ऐन वक्त पर यात्रियों को होने वाली असुविधा से राहत मिलेगी। आने वाले कुछ हफ्तों में रेलवे प्रभावित ट्रेनों की अंतिम सूची जारी कर सकता है।
अनिल चौधरी को विभिन्न मीडिया संस्थानों में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत (हरिभूमि हिंदी समाचार पत्र) से प्रिंट मीडिया में की, जहां खबरों की बुनियादी समझ और लेखन की गंभीरता सीखी। इसके बाद उन्होंने अमर उजाला (हिंदी समाचार पत्र) में 7 वर्षों तक कार्य किया। अनिल कुमार की बिजनेस, मनोरंजन, सरकारी योजनाएं और रेलवे से संबंधित खबरों पर मजबूत पकड़ है। वर्तमान में अनिल कुमार डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपनी सेवाएं दे रहे हैं।