Jind News : हरियाणा के जींद शहर में नगर परिषद के अंतर्गत आने वाली बेशकीमती जमीन पर निजी दावा हो गया है। जिस जमीन पर निजी दावा हुआ है, उस पर 100 करोड़ की सरकारी परियोजना बननी थी और शहर के बीच में होने के कारण कुछ हिस्से में कालोनी भी विकसित हो चुकी है। अब यह मामला कोर्ट में पहुंच गया है और कोर्ट ने याचिका को स्वीकार भी कर लिया है। अब अदालत ही तय करेगी इस जमीन पर किसका हक है।
जींद शहर के रानी तालाब के पास आडिटोरियम, कम्युनिटी सेंटर, पार्किंग बनाने का प्रस्ताव है और इसके लिए 100 करोड की परियोजना भी घोषित हो चुकी है। वहां कुछ लोग मालिकाना हक जता रहे हैं। उन्होंने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें सुप्रीम कोर्ट में चल रहे एक मामले का हवाला देते हुए नप के इस जमीन पर निर्माण पर रोक लगाने की मांग की थी। हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट का फैसला नहीं आने तक जमीन पर निर्माण पर रोक लगा दी है।
इसी तरह जिला अदालत में भी कुछ लोगों ने मालिकाना हक जताते हुए याचिका लगाई हुई है। याचिकाकर्ता नरेंद्र पहल के अनुसार अदालत ने उनकी अपील स्वीकार कर ली। शहर के गुरुद्वारा के सामने लंबे समय से खाली जमीन पड़ी है। नगर परिषद इसे अपनी जमीन बताती है और यहां पार्किंग बनाने की योजना थी। त्योहारी सीजन में यहां अस्थायी पार्किंग भी बनाई गई। अप्रैल में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने रैली में भी यहां आडिटोरियम व पार्किंग बनाने की घोषणा की थी।
याचिकाकर्ता का 289 कनाल दो मरले जमीन पर मालिकाना हक का दावा
जिला अदालत में याचिका लगाने वाले नरेंद्र पहल ने कहा कि 289 कनाल दो मरले यानी 36.13 एकड़ जमीन चमेली देवी की है और इसका इंतकाल भी उसके नाम दर्ज था। इसमें गुरुद्वारा के सामने वाली गड्ढा वाली जमीन के साथ-साथ कौशिक नगर व आसपास का क्षेत्र भी शामिल है। चमेली देवी के स्वजनों ने इस जमीन की अटार्नी पावर उसे दी हुई है। जमीन का मालिकाना हक दिलाने के लिए उसने जिला अदालत में याचिका लगाई थी। अदालत ने उसकी याचिका स्वीकार कर ली। पिछले दिनों सुनवाई थी। नगर परिषद से भी जवाब मांगा गया था। वहीं सुप्रीम कोर्ट में जयसिंह बनाम स्टेट चल रहा है।
बाजार के नजदीक जमीन, व्यावसायिक रूप से काफी महत्वपूर्ण
बाजार के नजदीक होने की वजह से व्यावसायिक रूप से भी इस जमीन का काफी महत्व है। मार्केट वैल्यू भी काफी ज्यादा है। इस जमीन का मामला कोर्ट में जाने का मामला शहर में भी चर्चा का विषय बना हुआ है। चर्चा यहां तक है, अगर कोर्ट में ये मामला जल्द नहीं निपटता है, तो नगर परिषद को आडिटोरियम व कम्युनिटी सेंटर के लिए दूसरी जगह जमीन तलाशनी पड़ सकती है।
अदालत में जवाब दिया
नप के कार्यकारी अधिकारी सुशील कुमार ने कहा कि अदालत ने जवाब मांगा था। नगर परिषद की तरफ से जवाब दे दिया गया है। गुरुद्वारा के सामने वाली जमीन नगर परिषद की है। इस जमीन के मालिकाना हक को लेकर पहले भी विवाद हो चुका है। सुप्रीम कोर्ट तक भी मामला पहुंचा हुआ है। पिछले साल भी मामला उठा था। तब डीएमसी की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई थी।
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