famine occurred in Rajasthan : राजस्थान के 2460 गांव के लोग मुसीबत के बीच से निकल रहे है। खेतों में फसलें सूख गई, बारिश की आस टूट गई और अब पशुओं के सामने चारे का संकट खड़ा हो गया है। अकाल की मार झेल रहे बाड़मेर जिले में गोवंश के लिए हालात लगातार मुश्किल होते जा रहे हैं। एक ओर खेतों में चारे की कमी है, दूसरी ओर राहत की उम्मीद में पशुपालक प्रशासन की ओर देख रहे हैं। लेकिन जिले के सूखाग्रस्त गांवों में अब तक न चारा डिपो खुले है और न ही पशु शिविर शुरू हुए हैं। ऐसे में पशुओं के भरण-पोषण को लेकर संकट गहराने लगा है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 30 सितंबर को बाछड़ाऊ में आयोजित सभा में जिले के अकालग्रस्त गांवों में चारा डिपो और पशु शिविर खोलने के लिए बजट की घोषणा की थी। इसके बाद प्रशासन की ओर से प्रस्ताव बनाकर राज्य सरकार को भेजे गए, लेकिन अब तक राहत के इंतजाम धरातल पर नजर नहीं आ रहे हैं। घोषणा और उसके क्रियान्वयन के बीच का इंतजार पशुपालकों की परेशानी बढ़ा रहा है।
40 अरब रुपए के नुकसान का अनुमान
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, जिले में इस बार करीब 150 लाख मीट्रिक टन कृषि उत्पादन का अनुमान था, लेकिन फसलों में करीब 80 फीसदी खराबा हुआ है। इससे लगभग 40 अरब रुपए के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है। राजस्व विभाग की ओर से 92.2 फीसदी गिरदावरी की जा चुकी है। फसल खराबे के इन आंकड़ों के बीच चारे की उपलब्धता भी बड़ी चिंता बन गई है।
लंबे सूखे ने बढ़ाया नुकसान
कृषि विशेषज्ञ प्रदीप पगारिया ने बताया कि इस बार जिले में औसत से करीब 150 एमएम कम बारिश हुई है। जुलाई के बाद लगातार 45 दिन तक सूखे की स्थिति रही। इसी वजह से फसलों को ज्यादा नुकसान हुआ है। उनके अनुसार, बाड़मेर जिले में करीब 80 फीसदी फसल खराबा हुआ है।
2460 गांव अकाल की चपेट में
जिले के कुल 2738 गांवों में से 2460 गांव अकालग्रस्त घोषित किए गए हैं। इन क्षेत्रों में 80 से 100 फीसदी तक फसलें खराब होने का अनुमान है। बारिश की कमी और लंबे समय तक सूखे की स्थिति ने खेती-किसानी को बड़ा नुकसान पहुंचाया है। फसलें खराब होने से पशुओं के लिए खेतों से मिलने वाला चारा भी कम हो गया है। ऐसे में पशुपालकों के सामने पशुओं को खिलाने के लिए चारे की व्यवस्था करना चुनौती बन गया है।


