सवाई माधोपुर। विश्व प्रसिद्ध रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान इन दिनों वन्यजीव प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। बाघिन टी-134, जिसे दुर्गा के नाम से जाना जाता है, अपने तीन शावकों के साथ जोन-4 के मलिक तालाब क्षेत्र में देखी गई है। मां और शावकों की इस शानदार साइटिंग ने सफारी पर निकले पर्यटकों को रोमांचित कर दिया है। वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में इतने करीब से देखना पर्यटकों के लिए एक यादगार अनुभव साबित हो रहा है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सफारी के दौरान बाघिन दुर्गा झाड़ियों से बाहर निकलकर खुले क्षेत्र में आई। इस दौरान उसके तीनों शावक अपनी मां के इर्द-गिर्द अठखेलियां करते हुए नजर आए। पानी के स्रोत के पास बाघिन और शावकों की मौजूदगी ने पर्यटकों को वन्यजीवों के नैसर्गिक व्यवहार को करीब से समझने का अवसर दिया। पर्यटकों ने इन खूबसूरत पलों को अपने कैमरों में कैद किया, जो सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बने हुए हैं।
उप वन संरक्षक मानस सिंह ने बताया कि बाघिन दुर्गा और उसके तीनों शावक पूरी तरह स्वस्थ हैं। वन विभाग की टीमें उनकी गतिविधियों पर निरंतर निगरानी रख रही हैं ताकि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। अधिकारियों का कहना है कि बाघिन और उसके शावकों की मौजूदगी रणथंभौर के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों की सफलता को दर्शाती है। पार्क प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह है कि इन वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास में मानवीय हस्तक्षेप कम से कम हो।
रणथंभौर में बाघों के कुनबे का बढ़ना वन्यजीव पर्यटन के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। पार्क में बाघों की नियमित साइटिंग से पर्यटकों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है। वन विभाग ने पर्यटकों से अपील की है कि वे सफारी के दौरान नियमों का पालन करें और वन्यजीवों की शांति भंग न करें। आने वाले समय में इन शावकों का विकास रणथंभौर के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिस पर वन विभाग की पैनी नजर बनी हुई है।
