राजस्थान की जमीन अब परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में पहचान बनाने वाली है। केंद्र सरकार के 3000 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट स्थापित किया जाएगा और इसके लिए सीकर जिले के गांव रॉयल की 500 बीघा यानी 312 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। इस 3000 करोड़ रुपये के माध्यम से राजस्थान में पहला यूरेनियम प्लांट स्थापित होने वाला है। यह प्लांट यूरेनियम कॉर्परिशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (यूसीआईएल) द्वारा स्थापित किया जाएगा और इस प्रोजेक्ट को पूरा करने का लक्ष्य 2030 रखा गया है।
अधिग्रहण जमीन का इस प्रकार दिया जाएगा मुआवजा
राजस्थान के रॉयल गांव की जमीन को सरकार द्वारा अधिग्रहण किया जाएगा। इसके लिए 500 बीघा यानी 312 एकड़ जमीन को अधिग्रहण किया जाएगा। प्रशासन जमीन के मालिक का दह माह का सर्वे करेगा। जहां पर उनकी आर्थिक सामाजिक स्थिति, खेती और रोजगार के लिए नौकरी पर निर्भरता का अनुमान लगाया जाएगा। इसके बाद उस जमीन का मुआवजा निर्धारित किया जाएगा। किसानों को अधिग्रहण हुई जमीन का मुआवजा अप्रैल माह तक मिल सकता है।
राजस्थान में 12 मिलियन टन यूरेनियम की पुष्टि
राजस्थान के खंडेला क्षेत्र के गांव रालय में 1086.46 हेक्टेयर क्षेत्र में यूरेनियम भंडार की पुष्टि हुई थी। वर्ष 2005 में हुए सर्वे के मुताबिक यहां पर 12 मिलियन टन यूरेनियम भंडार होने की संभावना जताई गई है। खनिज विभाग ने यूसीआईएल के आवेदन पर वर्ष 2022 में खनन के लिए आशय पत्र (एलओआई) जारी किया था।
पांच हजार लोगों को मिलेगा रोजगार
यूरेनियम के लगने वाले प्लाट में रोजगार के अवसर भी खुलने वाले है। इस प्रोजेक्ट पर करीब तीन हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सीकर जिले में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब पांच हजार लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है। रॉयल और सुहागपुरा गांव में करीब 400 फीट गहराई तक खुदाई कर यूरेनियम निकाला जाना है। विशेषज्ञों के अनुसार, यहां चट्टानों के बीच धार के रूप में यूरेनियम मिला है। इसकी गुणवत्ता झारखंड के यूरेनियम के समान बताई गई है। खनन के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति की प्रक्रिया भी जारी है।


