सवाई माधोपुर। सवाई माधोपुर जिले के ऐतिहासिक सूरवाल बांध के डूब क्षेत्र में आने वाले गांवों के किसानों के सामने एक गंभीर संकट खड़ा हो गया है। बांध में जलभराव के कारण हजारों बीघा उपजाऊ कृषि भूमि पानी में डूब गई है, जिससे क्षेत्र के सैकड़ों किसान रबी सीजन की मुख्य फसलों की बुवाई करने में असमर्थ हैं। आज आयोजित एक प्रेस वार्ता में पीड़ित किसानों और ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग के प्रति अपना आक्रोश व्यक्त करते हुए बांध की नहरों को तुरंत खोलने की मांग की है।
प्रेस वार्ता के दौरान किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि बांध में जलभराव की निर्धारित सीमा 11 फीट है, लेकिन इस बार प्रशासन ने करीब 16 फीट तक पानी रोक रखा है। क्षमता से अधिक पानी रोकने के कारण यह जलभराव आसपास के खेतों में फैल गया है, जिससे उपजाऊ जमीन तालाब में तब्दील हो गई है। किसानों का कहना है कि विभाग की इस लापरवाही ने उनकी आजीविका के एकमात्र साधन को छीन लिया है और वे भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं।
अक्टूबर का महीना रबी फसलों की बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है, लेकिन खेतों में तीन से चार फीट पानी जमा होने के कारण ट्रैक्टर और कृषि उपकरण चलाना असंभव हो गया है। यदि समय रहते पानी की निकासी नहीं की गई, तो इस साल किसान बुवाई नहीं कर पाएंगे, जिससे न केवल फसलों का नुकसान होगा बल्कि मवेशियों के चारे का भी गंभीर संकट पैदा हो जाएगा। ग्रामीण अपनी व्यथा सुनाते हुए कहते हैं कि वे अपनी मेहनत की कमाई को पानी में डूबते देख रहे हैं।
किसानों ने अपनी मांगों को स्पष्ट करते हुए कहा है कि बांध की नहरों को तुरंत खोलकर पानी की निकासी की जाए ताकि जमीन सूख सके और बुवाई शुरू हो सके। साथ ही, उन्होंने मांग की है कि भविष्य के लिए जलभराव की सीमा को वापस 11 फीट तक सीमित किया जाए। इसके अलावा, जिन किसानों की फसलें बर्बाद हुई हैं या जो बुवाई नहीं कर पा रहे हैं, उन्हें सरकार द्वारा उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए ताकि वे इस आर्थिक नुकसान से उबर सकें।
किसानों ने जिला प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे कलेक्ट्रेट का घेराव करने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि वे पहले भी अधिकारियों को अवगत करा चुके हैं, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। अब यदि स्थिति बिगड़ती है और उन्हें उग्र आंदोलन करना पड़ता है, तो इसकी समस्त जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी। इस प्रेस वार्ता में घुड़ासी, सूरवाल और आसपास के गांवों के बड़ी संख्या में प्रभावित किसान उपस्थित रहे।
