Barmer news: राजस्थान प्रदेश में पंचायती चुनाव के बीच इन दिनों बाड़मेर जिले का जैसिंधर गांव चर्चा का विषय बना हुआ है। मात्र 1600 की आबादी वाला बाड़मेर के दुर-दराज इलाके में भारत-पाक बॉर्डर से सटे जैसिंधर गांव के विकास पर पिछले 20-25 सालों में 100 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं।
इस गांव में जिला मुख्यालय जैसी सुविधाएं भी दी गई हैं। पंचायतीराज चुनाव में इस बार इस गांव की कहानी अलग ही है। यहां सीट चाहे किसी की भी आए, लेकिन यहां सरपंच तो एससी से ही बनता है। वजह यह भी है कि यहां सर्वाधिक आबादी एससी जाति के लोगों की है। पंचायतीराज चुनाव में सरपंच की सीट सामान्य महिला है, लेकिन सरपंच के लिए दावेदारी दो एसपी परिवार से ही हो रही है।
जैसिंधर से बदलकर जैसिंधर स्टेशन रखा गया नाम
बाड़मेर जिले में बॉर्डर के अंतर्राष्ट्रीय पहचान वाले मुनाबाव से महज 5 किलोमीटर पहले जैसिंधर स्टेशन गांव है। पूर्व में यह जैसिंधर ग्राम पंचायत का ही हिस्सा था, लेकिन अब इसे जैसिंधर स्टेशन के नाम से जाना जाता है, क्योंकि इस गांव में रेलवे स्टेशन भी है। भारत-पाक बॉर्डर तारबंदी से सटे इस ग्राम पंचायत की आबादी 1600 और वोटर 1288 हैं। इस छोटे से गांव के रहवासियों को जिला मुख्यालय और रेलवे स्टेशन सहित बड़े शहरों जैसी तमाम सुविधाएं मिल रही हैं।
सबसे बड़ा आवासीय स्कूल, 568 विद्यार्थियों के लिए 124 कमरे
भारत-पाक सीमा से सटे बाड़मेर जिले के जैसिंधर स्टेशन और आसपास के ग्रामीण इलाके में शिक्षा, कौशल विकास और नागरिक सुविधाओं के विस्तार पर पिछले वर्षों में 112 करोड़ रुपए से अधिक का बजट खर्च किया गया है। इस गांव में शिक्षा के क्षेत्र में सबसे बड़ा निवेश आवासीय विद्यालय के रूप में हुआ है। वर्ष 2012-13 में स्वीकृत इस प्रोजेक्ट पर कुल 32.25 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
15 चरणों में तैयार इस परिसर में कक्षा 12वीं तक के 284 छात्र और 284 छात्राओं (कुल 568 विद्यार्थी) के रहने व पढ़ने की व्यवस्था है। इस स्कूल में कुल 124 लेट-बाथरूम अटैच कमरे हैं। वर्ष 2000 में जर्मन सरकार के सहयोग से देश भर में स्वीकृत 10 विशेष स्कूलों में से एक स्कूल जैसिंधर स्टेशन में स्थापित किया गया था।
जैसिंधर गांव में बन रहा है 25 करोड़ का केंद्रीय विद्यालय
जैसिंधर गांव में 25 बीघा जमीन पर 25 करोड़ की लागत से 300 बच्चों की क्षमता वाला भव्य केंद्रीय विद्यालय भवन है। केवी स्कूल अन्य किराए के भवनों में संचालित हो रहा है। केंद्रीय स्कूल की बिल्डिंग का निर्माण चल रहा है। जो छह माह में पूरा हो जाएगा। स्कूलों में पढ़ने वाले कमजोर वर्ग के 50 विद्यार्थियों के लिए 60 से 70 लाख की लागत से 5 बीघा में अंबेडकर छात्रावास और 2009 में 33.15 लाख की लागत से बालिका छात्रावास तैयार किया गया है।