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राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली रूट के रेल यात्रियों के लिए बड़ा बदलाव, अब बाडी कैमरे से होगी टिकट चेकिंग

राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली रूट के रेल यात्रियों के लिए बड़ा बदलाव
राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली रूट के रेल यात्रियों के लिए बड़ा बदलाव

Railway News : राजस्थान से हरियाणा होकर दिल्ली, चंडीगढ़ सहित विभिन्न ट्रेनों में अब टिकट चेकिंग का पूरा तरीका ही बदल गया है। जयपुर मंडल के तहत आने वाले रेवाड़ी, नारनौल और बावल जैसे प्रमुख स्टेशनों और इस रूट से गुजरने वाली ट्रेनों में अब टिकट चेकिंग की पूरी तस्वीर बदलने जा रही है।

ट्रेनों में चेकिंग के दौरान टीटीई और यात्रियों के बीच होने वाली कहासुनी, बहसबाजी, बदसलूकी और झूठे आरोपों पर विराम लगाने के लिए रेलवे ने बॉडी वॉर्न कैमरों से लैस आधुनिक व्यवस्था तैयार की है। जयपुर मंडल की ओर से मंगवाए गए 50 आधुनिक कैमरों का दायरा इस हरियाणा रूट पर भी रहेगा, क्योंकि इस मंडल के अंतर्गत रेवाड़ी, नारनौल और बावल समेत कई अन्य स्टेशन आते हैं और यहां से कई महत्वपूर्ण गाड़ियां गुजरती हैं।

इस हाई-टेक पहल की शुरुआत जोधपुर-दिल्ली कैंट वंदे भारत एक्सप्रेस और अजमेर-चंडीगढ़ वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों से होगी, जो रेवाड़ी होकर गुजरती हैं। इसके बाद राजधानी एक्सप्रेस और अन्य श्रेणियों की ट्रेनों में घटते क्रम में इन कैमरों के साथ टीटी को तैनात किया जाएगा, जिससे सफर के दौरान हर गतिविधि पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी हो सकेगी।

जानिए इस हाई-टेक पहल के 3 बड़े फायदे

इस आधुनिक व्यवस्था के लागू होने से यात्रियों और रेलवे दोनों को बड़े स्तर पर राहत मिलेगी। महिला यात्रियों से अभद्रता या रिश्वत जैसी गंभीर शिकायतों की वीडियो फुटेज के जरिए बिल्कुल सटीक और निष्पक्ष जांच संभव हो सकेगी।

रेल मदद ऐप पर मिलने वाली शिकायतों का फुटेज देखकर मौके पर ही त्वरित निस्तारण किया जा सकेगा, जिससे लंबी जांच प्रक्रियाओं से छुटकारा मिलेगा। इसके अलावा, कैमरों की निगरानी के डर से बिना टिकट यात्रा करने वालों पर प्रभावी लगाम कसेगी, जिससे रेलवे के राजस्व में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।

रिकॉर्डिंग से नहीं की जा सकेगी छेड़छाड़

सुरक्षा और गोपनीयता के कड़े मानकों को ध्यान में रखते हुए इन हाई-टेक कैमरों को पूरी तरह पासवर्ड प्रोटेक्टेड और एन्क्रिप्टेड डिजाइन किया गया है। आकार में महज अंगूठे जितने इन कैमरों को टीटीई स्टाफ की विशेष जैकेट पर लगाया जाएगा, जो चेकिंग के दौरान होने वाली बातचीत, लेनदेन और किसी भी विवाद की स्पष्ट ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग सुरक्षित करेंगे।

ड्यूटी समाप्त होने के बाद टीटीई को कैमरा स्टेशन पर जमा कराना होगा, जहां से पूरा डेटा ऑटो-अपलोड होकर रेलवे के सेंट्रल सर्वर या क्लाउड स्टोरेज पर सुरक्षित हो जाएगा। रिकॉर्ड किए गए डेटा से कोई भी कर्मचारी छेड़छाड़ नहीं कर सकेगा और न ही इसे एडिट या डिलीट करना संभव होगा, जिससे यात्रियों के झूठे आरोपों और टीटीई की मनमानी दोनों पर अंकुश लगेगा।

आगामी दो-तीन महीनों में पूरी तरह लागू होगी व्यवस्था

उत्तर पश्चिम रेलवे सीपीआरओ अमित सुदर्शन ने बताया कि इस पहल से टिकट चेकिंग व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी और प्रक्रिया तेज होगी, साथ ही अनावश्यक शिकायतें भी घटेंगी। जयपुर मंडल से इसकी शुरुआत हो रही है और पहले चरण में 50 कैमरे मंगाए गए हैं। आगामी दो से तीन महीने में यह व्यवस्था पूरी तरह धरातल पर उतर जाएगी।

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