Udaipur news: राजस्थान प्रदेश के उदयपुर शहर स्थित महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (MPUAT) के नवीकरणीय ऊर्जा अभियांत्रिकी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. एनएल पंवार ने धान के अवशेष और कृषि कचरा से ठोस कोयला बनाने की तकनीक तैयार की है। डॉ. एनएल पंवार द्वारा तैयार की गई यह तकनीक हवा की गैर मौजूदगी में भी 300 डिग्री पर फसल अवशेष पकाने का काम करेगी। महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर के डॉ. एनएल पंवार द्वारा तैयार की गई बायोमास टॉरिफैक्शन इकाई अब किसानों द्वारा खेतों में फसल काटने के बाद बचने वाले कृषि अवशेष से उच्च गुणवत्ता वाला बायो-फ्यूल तैयार करेगी। एमपीयूएटी की यह तकनीक आने वाले समय में राजस्थान प्रदेश के पड़ोसी राज्य पंजाब और हरियाणा के के किसानों के लिए वरदान साबित होगी।
बायोमास टॉरिफैक्शन इकाई 30 किलोग्राम कृषि अवशेषों को प्रोसेस कर ठोस ईंधन में बदलेगी हर घंटे
एमपीयूएटी यूनिवर्सिटी में नवीकरणीय ऊर्जा अभियांत्रिकी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. एनएल पंवार द्वारा तैयार की गई बायोमास टॉरिफैक्शन इकाई हर घंटे 30 किलोग्राम कृषि अवशेषों को प्रोसेस कर ठोस ईंधन में बदलेगी। एमपीयूएटी के कुलपति डॉ. प्रताप सिंह ने बताया कि इस इनोवेटिव रिसर्च के लिए भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (MPUAT) को इस इकाई को तैयार करने हेतु 42 लाख रुपए का बजट दिया गया था। उन्होंने कहा कि यह तकनीक देश के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए पर्यावरण को अनुकूल बनाने और पेट्रोल-डीजल और कोयले जैसे जीवाश्म ईंधनों पर लगातार बढ़ रही लोगों की निर्भरता को भी कम करने कभी काम करेगी।


