Rajasthan News: राजस्थान में राजसमंद जिले के पिपलांत्री गांव में कभी खदानों से उड़ती धूल, उखड़ी सड़कें और जलस्तर 800 फीट गहरा था। रोजगार के लिए युवा पलायन कर शहरों में जाते थे। लेकिन 2025 के बाद इस गांव की तकदीर ही बदल गई है। पद्मश्री श्यामसुंदर पालीवाल (पूर्व सरपंच, पिपलांत्री) के अनुसार पर्यावरण संरक्षण में महिलाओं के योगदान 'इको-फेमिनिज्म' के दम पर अब पिपलांत्री गांव राजस्थान प्रदेश के लिए मॉडल बन चुका है। उन्होंने कहा कि पिपलांत्रीः ए टेल ऑफ इको फेमिनिज्मः डॉक्यूमेंट्री को 22 सितंबर को ही राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। श्याम सुंदर पालीवाल बताते हैं कि मार्बल के बेतहाशा व्यावसायिक दोहन से पिपलांत्री गांव का पारिस्थितिकी तंत्र भी बिगड़ चुका था। जलस्तर लगातार गिर रहा था और बंजर होती जमीन ने गांव की कमर ही तोड़ दी थी। उन्हीं दिनों गांव की एक बेटी की आकस्मिक मृत्यु हो गई, जो पिपलांत्री गांव की किस्मत बदलने के लिए टर्निंग पॉइंट बन गई।
पंचायत ने गांव की बेटी की याद में शुरू किया अभियान
पिपलांत्री गांव में एक बेटी की आकस्मिक मौत के बाद पंचायत ने लीक से हटकर सोचा। उस बेटी की याद में एक पौधा लगाने से शुरू हुआ वह सफर बड़े बदलाव का अगुवा या कहें कि मॉडल बन चुका है। तब से हर बेटी के जन्म पर 111 पौधे लगाए जाने लगे। गांव की महिलाएं इन पौधों की परवरिश बच्चों की तरह करती हैं। बालिकाओं का भविष्य सुरक्षित करने के लिए उनके नाम से 31,000 रुपए सुकन्या समृद्धि खातों में जमा कराते हैं, ताकि उच्च शिक्षा के लिए भी उनके परिवार वालों को आर्थिक दिक्कत नहीं हो। इस गांव में करीब 160 बच्चियों के नाम ये खाते खुल चुके हैं।
पिपलांत्री गांव में चल रहा है अटल भूजल योजना के कार्यों का शिलान्यास
पिपलांत्री गांव अब राजस्थान प्रदेश के लिए एक मॉडल बन चुका है। इस गांव में अब अटल भूजल योजना के कार्यों का शिलान्यास किया जा रहा है। गांव में लेपर्ड सफारी और होम स्टे जैसी योजनाओं पर भी काम चल रहा है। पिपलांत्री को हाल ही भारत का पहला ऐसा गांव घोषित किया जिसमें कार्बन क्रेडिट के रूप में भी आय हो रही है।
डेनमार्क ने पिपलांत्री गांव के 10 प्रोजेक्ट्स को अपने स्कूली कोर्स में किया शामिल
पिपलांत्री गांव अब राजस्थान में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में विख्यात हो चुका है। डेनमार्क ने दुनिया के 110 बेहतरीन प्रोजेक्ट्स में से मेरे 10 प्रोजेक्ट्स को अपने स्कूली कोर्स में लिया है, ताकि छात्र पर्यावरण संरक्षण के मेरे प्रयोगों के बारे में जान सके। बता दें कि दिसंबर 2024 में तत्कालीन सीजेआई जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस संदीप मेहता और एसवीएन भट्टी की बेंच ने कहा था कि सामुदायिक पहल से पर्यावरणीय चुनौतियों का मिलकर सामना किया जा सकता है। राजस्थान प्रदेश का राजसमंद जिले में स्थित पिपलांत्री गांव अब उनकी बात को सच करता हुआ दिखाई दे रहा है।


