देश के विभिन्न राज्यों के शहरों में रिहायशी कॉलोनियों में रहने वाले लोगों के लिए यह काम की खबर हो सकती है। वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सोमानी के अनुसार किसी भी रिहायशी कॉलोनी में स्थाई तौर पर आमजन के लिए लगाए गेट को बंद रखना कानूनी प्रावधानों के उल्लंघन के दायरे में आता है। कानून के अनुसार यह पब्लिक न्यूसेंस की केटेगरी में आता है। कानून के तहत रिहायशी कॉलोनी में बिना स्थानीय निकाय की मंजूरी के आम रास्ते पर गेट लगाना अतिक्रमण माना जाता है। अधिवक्ता विकास सामान्य ने बताया कि सार्वजनिक या आम रास्ता रोकना भारतीय न्याय संहिता की धारा 285 के तहत पब्लिक न्यूसेंस है। ऐसे में आप रिहायशी कॉलोनी का जबरन गेट बंद करने पर संबंधित थाने या अधिकारी के यहां पर इसके लिए मामला भी दर्ज करा सकते हैं। इसके अलावा स्थानीय निवासी कॉलोनी में किसी रास्ते पर बिना मंजूरी गेट लगाने पर कानूनी प्रावधानों के अनुसार स्थानीय निकाय से कार्रवाई भी करवा सकते हैं।
रिहायशी कॉलोनी का गेट जबरन बंद करने पर जेडीए, नगर निगम या हाउसिंग बोर्ड में करें शिकायत
रिहायशी कॉलोनी के आम रास्ते पर गेट लगाने और उसे स्थाई तौर पर बंद रखने पर स्थानीय निकाय जेडीए, नगर निगम या हाउसिंग बोर्ड के यहां पर इसकी शिकायत दर्ज करवाई जा सकती है। अधिवक्ता विकास ने बताया कि कानूनी प्रावधानों के अनुसार स्थानीय निवासी इसके खिलाफ एडीएम के पास भी कार्रवाई करवाने के लिए दावा दायर कर सकते हैं। स्थानीय निवासी रिहायशी कॉलोनी का जबरन गेट बंद करने या लगाने पर क्षतिपूर्ति राशि दिलवाले का दावा भी कर सकते हैं।
क्या है कानूनी प्रक्रिया ?
अधिवक्ता विकास सोमानी ने बताया कि किसी भी रास्ते पर भी बिना स्थानीय निकाय की मंजूरी के गेट नहीं लगाया जा सकता। कॉलोनी के छोटे रास्ते पर भी गेट लगाकर उसे जबरन स्थाई तौर पर बंद रखना भी गलत है। यदि स्थानीय निकाय की मंजूरी से गेट लगाया भी है तो उसे 24 घंटे बंद नहीं रख सकते। इससे पीड़ित पक्ष कानूनी प्रावधानों के अनुसार एडीएम के यहां परिवाद दायर कर सकते हैं। एडीएम परिवाद पर सुनवाई कर पुलिस थाने को आवश्यक कार्रवाई का निर्देश दे सकता है। इसके अलावा पीड़ित पक्ष क्षतिपूर्ति भी प्राप्त करने का अधिकारी है।


