Rajasthan News: राजस्थान प्रदेश में इस बार मानसून कमजोर रहने का व्यापक असर पड़ा है। पहले से ही सूखे से परेशान राजस्थान राज्य में इसके कारण पशुओं के लिए चारे और पानी का संकट आन खड़ा हुआ है। इससे निपटने के लिए अब सरकार द्वारा योजना तैयार की जा रही है। ताकि पशुओं के लिए उचित चारे और पानी की व्यवस्था हो सके।
इस बार राजस्थान सहित देश के कई हिस्सों में मानसून की बारिश सामान्य से काफी कम हुई है। इससे भयंकर स्थिति हो गई है। सबसे अधिक असर पशुओं के लिए निर्धारित व्यवस्था पर पड़ रहा है। राजस्थान में इसका व्यापक असर भी दिख रहा है। गौरतलब है कि राजस्थान में इस बार मानसून के सीजन में 351 मिलीमीटर बारिश हुई है। वहीं राजस्थान में औसत बारिश 424.71 एमएम रहती है। हालांकि पिछले साल मानसून अच्छा रहा था और 715.2 एमएम बारिश हुई थी।
31 जिलों की हालत बनी हुई है चिंताजनक
सरकारी आंकड़ों के अनुसार राजस्थान के कुल 41 में से 31 जिलों की हालत काफी चिंताजनक पाई गई है। इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि किस प्रकार सूखे असर राज्य में रहा है। इस स्थिति से निपटने के लिए राज्य सरकार ने प्रयास भी शुरू कर दिए हैं। इसके तहत हरियाणा, पंजाब और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों से चारा उपलब्ध करवाने की योजना है।
हरियाणा, पंजाब और एमपी से मांगी मदद
गौरतलब है कि फिलहाल हरियाणा और पंजाब के साथ मध्यप्रदेश में भी धान कटाई का सीजन चल रहा है। इस सीजन में किसानों के लिए धान की पराली काफी परेशानी खड़ी करती है। वहीं राजस्थान के किसानों के लिए यही पराली पशुओं को चारा देने में काम आ सकती है। इसके लिए राजस्थान प्रदेश की ओर से इन राज्यों को पराली उपलब्ध करवाने के लिए अपील की गई है।
प्रदेश घर में खोले जाएंगे चारा शिविर
इस संकट से पार पाने के लिए राज्य सरकार द्वारा प्रदेश भर में चारा शिविर शुरू किए जाएंगे। इसके लिए स्वयं राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने निर्देश दिए हैं। इतना ही नहीं पशुओं को पर्याप्त पानी उपलब्ध करवाने के लिए टैंकर की सर्विस शुरू की जाएगी।
जोधपुर सहित 9 जिलों में स्थिति हुई गंभीर
सूखे की रिपोर्ट के आधार पर राजस्थान सरकार ने 9 जिलों को गंभीर श्रेणी में रखा है। इसमें जैसलमेर, बाड़मेर, बालोतरा, जोधपुर और दौसा शामिल हैं। इसके अलावा बीकानेर, चूरु, जालौर, जयपुर, हनुमानगढ़, जैसे 22 जिले आंशिक प्रभाव में शामिल हैं।


