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हरियाणा सरकारी भर्तियों में बदलेगा नियम! पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने HSSC-HPSC को दिए बड़े निर्देश

हरियाणा सरकारी भर्तियों में बदलेगा नियम! पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने HSSC-HPSC को दिए बड़े निर्देश

HSSC-HPSC Recruitment Decision : हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (एचएसएससी) और हरियाणा लोक सेवा आयोग (एचपीएससी) द्वारा निकाली जा रही भर्तियों को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने शुक्रवार को अहम फैसला दिया है। अब छोटी सी गलती के लिए अभ्यार्थी को चयन प्रक्रिया से बाहर नहीं किया जाएगा, बल्कि उसकी योग्यता के हिसाब से नौकरी दी जाएगी। हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (एचएसएससी) और हरियाणा लोक सेवा आयोग (एचपीएससी) द्वारा निकाली जाने वाली भर्तियों में लिखित परीक्षा पास करने व कटआउट में अधिक अंक प्राप्त करने के बावजूद आनलाइन आवेदन में छोटी गलती या गलत प्रमाण पत्र अपलोड होने की तकनीकी कमी के कारण अभ्यार्थी को चयन की प्रक्रिया से बाहर कर दिया जाता था,

लेकिन पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने इस पर संज्ञान लेते हुए कहा कि यह अभ्यार्थी के लिए अन्य है। एक साइबर कैफे वाली की गलती का परिणाम अभ्यार्थी को नहीं भुगतना पड़ेगा। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (एचएसएससी) और हरियाणा लोक सेवा आयोग (एचपीएससी) की भर्ती का उद्देश्य योग्य उम्मीदवारों का चयन करना है, न कि आवेदन या दस्तावेज अपलोड करने में हुई मानवीय गलतियों के लिए उन्हें बाहर करना।

जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ की एकल पीठ ने यह फैसला प्रदीप सहित 145 याचिकाओं का एक साथ निपटारा करते हुए हुए यह फैसला दिया। यह याचिका अधिकतर हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (एचएसएससी) और हरियाणा लोक सेवा आयोग (एचपीएससी) द्वारा निकाली गई विभिन्न भर्तियों से जुड़ा हुआ था। जबकि मुख्य रूप से यह याचिका प्राथमिक शिक्षक (पीआरटी), मेवात संवर्ग की भर्ती का था।

अभ्यार्थी ने हाईकोर्ट में दायर की थी यह याचिका

अभ्यार्थी प्रदीप ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी कि उसका पिछड़ा वर्ग बी के नए प्रमाणपत्र जारी करवाया था और उस पर तारीख और संदर्भ संख्या भी सही दर्ज थी, लेकिन जब उसने साइबर कैफे संचालक से आवेदन करवाया तो उसने गलती से पुराना प्रमाणपत्र अपलोड कर दिया। जबकि उस भर्ती की लिखित परीक्षा में 72.2 अंक मिले थे, जबकि उसकी संबंधित श्रेणी में कट आफ 70.30 अंक तक पहुंची थी। ऐसे में कट आफ से उसके ज्यादा अंक थे, लेकिन उसके प्रमाण पत्र में पुराना प्रमाण पत्र अपलोड होने के चलते उनको चयन प्रक्रिया से बाहर कर दिया। इसके कारण वह नौकरी से वंचित हो गया।

साइबर कैफे संचालक की गलती को अभ्यार्थी नहीं भुगते

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने प्रदीप के साथ अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि अभ्यर्थी साइबर कैफे और साझा सेवा केंद्रों से ही आनलाइन आवेदन करवाते है, लेकिन वहां पर किसी पर डिजिटल गलती हो जाती है तो उसका खामियाजा अभ्यार्थभ् को नहीं भुगतना चाहिए। संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत समान अवसर सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।

इसलिए हाईकोर्ट ने निर्देश दिए कि आवेदन की अंतिम तारीख के बाद आवेदन और अपलोड किए दस्तावेजों में सुधार का पर्याप्त समय मिले। दस्तावेज जांच में कमी पाए जाने पर अस्थायी अस्वीकृति का नोटिस देकर कम से कम सात दिन दिए जाएं।

प्रमाणपत्र अपलोड न होने पर, आवेदन में प्रमाणपत्र संख्या या परिवार पहचान संख्या दी गई हो तो सरकारी अभिलेखों और सरल पोर्टल से सत्यापन किया जाए। आवेदन की अंतिम प्रति में अपलोड दस्तावेजों के नाम स्पष्ट हों और भर्ती विज्ञापन में प्रमाणपत्र की अवधि, जारी होने की अंतिम तारीख तथा निर्धारित प्रारूप बताया जाए।

एचएसएससी और एचपीएससी दोनों को दिए निर्देश

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने यह आदेश हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (एचएसएससी) और हरियाणा लोक सेवा आयोग (एचपीएससी) दोनों को दिए गए है। उनका कहना है कि एचएसएससी और एचपीएससी को समान और सार्वजनिक नीति अपनानी होगी। अदालत ने आयोगों और संबंधित अधिकारियों को याचिकाकर्ताओं की पात्रता पर नए सिरे से विचार करने तथा कटआफ तारीख तक मौजूद दस्तावेज देने का अवसर देने को कहा। प्रमाणपत्र जारी करने वाले अधिकारियों से सत्यापन के बाद आठ सप्ताह में कारण सहित आदेश पारित करना होगा।

पात्र पाए जाने पर खाली पदों पर नियुक्ति मिलेगी

पात्र और मेधावी पाए जाने पर उपलब्ध रिक्तियों में नियुक्ति दी जाएगी, जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त पद भी बनाए जा सकते हैं। ऐसे अभ्यर्थियों को कम अंक पाने वाले चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति तारीख से काल्पनिक वरिष्ठता और अन्य परिणामी लाभ मिलेंगे, लेकिन वास्तविक वेतन कार्यभार ग्रहण करने की तारीख से मिलेगा। पहले से नियुक्त और लगातार काम कर रहे कर्मचारियों को नहीं हटाया जाएगा। मुख्य सचिव को तीन महीने में बाध्यकारी नीति बनाने का निर्देश दिया गया है, जिसका पालन दोनों आयोग करेंगे।

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