सवाई माधोपुर। पंचायती राज चुनाव की तैयारियों के बीच सवाई माधोपुर में सरकारी मशीनरी की व्यस्तता का सीधा असर आम जनता की रोजमर्रा की जरूरतों पर पड़ रहा है। जिले के कई महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालयों में कर्मचारियों की भारी कमी के कारण कामकाज पूरी तरह से प्रभावित हो गया है। जिला मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट परिसर में कई दफ्तरों के बाहर ताले लटके होने से दूर-दराज के गांवों से आने वाले लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
सबसे अधिक प्रभावित जिला रोजगार कार्यालय है, जहां अधिकारियों और कर्मचारियों की चुनावी ड्यूटी में तैनाती के चलते नियमित कामकाज ठप पड़ा है। यही स्थिति अन्य जनकल्याणकारी विभागों की भी है, जहां कर्मचारियों की अनुपस्थिति के कारण सन्नाटा पसरा हुआ है। जो लोग अपने जरूरी प्रमाण पत्र बनवाने या सरकारी योजनाओं के लाभ के लिए जिला मुख्यालय पहुंच रहे हैं, उन्हें बिना काम कराए ही मायूस होकर वापस लौटना पड़ रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोगों के लिए यह स्थिति दोहरी मार जैसी है, क्योंकि उनका न केवल कीमती समय बर्बाद हो रहा है, बल्कि यात्रा का खर्च भी व्यर्थ जा रहा है। प्रशासनिक कार्यों के लिए भटक रहे लोगों का कहना है कि चुनाव एक महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक प्रक्रिया है, लेकिन इसके साथ ही आमजन की प्रशासनिक जरूरतों को नजरअंदाज करना उचित नहीं है।
इस स्थिति ने जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय नागरिकों और प्रबुद्ध वर्ग का मानना है कि यदि प्रशासन ने पहले से कोई वैकल्पिक व्यवस्था की होती, तो आज यह नौबत नहीं आती। क्या रोटेशन के आधार पर कर्मचारियों की ड्यूटी नहीं लगाई जा सकती थी ताकि कार्यालयों में कम से कम न्यूनतम स्टाफ मौजूद रहे और जरूरी काम न रुकें?
अब स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि चुनावी जिम्मेदारियों के साथ-साथ सरकारी कार्यालयों में भी स्टाफ की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। कम से कम एक जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी की तैनाती हर विभाग में होनी चाहिए ताकि जनसमस्याओं का निस्तारण हो सके। प्रशासन को इस दिशा में तुरंत कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि जिला मुख्यालय आने वाले लोगों को अनावश्यक परेशानी से राहत मिल सके।

