देश की राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में हरियाणा अपना योगदान बढ़ाने वाला है। हरियाणा पहले ही छोटा राज्या होने के बावजूद देश की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान दे रहा है, लेकिन अब हरियाणा सरकार ने इसको बढ़ाने का प्लान बना लिया है। हरियाणा को आर्थिक मजबूती देने का काम किया जाएगा। देश के नक्शे पर महज 1.34 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र रखने वाला हरियाणा राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में 3.8 प्रतिशत योगदान दे रहा है।
यह आंकड़ा प्रदेश की आर्थिक क्षमता और औद्योगिक संभावनाओं को बयां करने के लिए काफी है। अब हरियाणा इसी आर्थिक ताकत को वैश्विक निवेश में बदलने की तैयारी कर रहा है। रणनीति साफ है, स्थापित औद्योगिक आधार को विस्तार देना, गुरुग्राम के कारपोरेट और तकनीकी इकोसिस्टम का लाभ उठाना तथा दुनिया की कंपनियों को प्रदेश में उत्पादन और कारोबार स्थापित करने के लिए आकर्षित करना।
इसी कड़ी में सरकार ने वर्ष 2030-31 तक पांच लाख करोड़ रुपये का नया निवेश लाने और 10 लाख से अधिक रोजगार के अवसर पैदा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। सबसे बड़ी निवेश संबंधी ताकत उसकी भौगोलिक स्थिति है। प्रदेश का लगभग 57 प्रतिशत क्षेत्र राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में आता है।
कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेसवे, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और प्रमुख औद्योगिक कारिडोर इसे देश के बड़े उपभोक्ता बाजारों और व्यापारिक केंद्रों से जोड़ते हैं। कंपनियों के लिए इसका अर्थ है बेहतर लाजिस्टिक्स, बाजारों तक आसान पहुंच और सप्लाई चेन की कम जटिलताएं। यहां 56 औद्योगिक एस्टेट संचालित हैं, जबकि 143 ब्लाकों में एमएसएमई क्लस्टर विकसित करने की पहल की जा रही है।
इससे बड़ी कंपनियों के साथ-साथ सहायक इकाइयों और छोटे उद्यमों के लिए भी निवेश की संभावनाएं बनती हैं। गुरुग्राम ने हरियाणा को वैश्विक कारपोरेट पहचान दिलाई है। यहां 250 से अधिक फॉर्च्यून-500 कंपनियों के कार्यालय, करीब 270 ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर और 19 यूनिकार्न कंपनियां कार्यरत हैं।
हैपनिंग हरियाणा 2.0 से वैश्विक कंपनियों को न्योता
निवेश की संभावनाओं को विस्तार देने के लिए 5 से 7 अप्रैल 2027 तक गुरुग्राम में 'हैपनिंग हरियाणा 2.0 ग्लोबल इनवेस्टर्स समिट' आयोजित की जाएगी। समिट की तैयारियों के तहत मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद और गुजरात में रोड शो किए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और उद्योग मंत्री राव नरबीर सिंह के जापान और स्वीडन दौरे भी इसी निवेश अभियान का हिस्सा हैं।
अनिल चौधरी को विभिन्न मीडिया संस्थानों में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत (हरिभूमि हिंदी समाचार पत्र) से प्रिंट मीडिया में की, जहां खबरों की बुनियादी समझ और लेखन की गंभीरता सीखी। इसके बाद उन्होंने अमर उजाला (हिंदी समाचार पत्र) में 7 वर्षों तक कार्य किया। अनिल कुमार की बिजनेस, मनोरंजन, सरकारी योजनाएं और रेलवे से संबंधित खबरों पर मजबूत पकड़ है। वर्तमान में अनिल कुमार डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपनी सेवाएं दे रहे हैं।