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विदेशी निर्भरता खत्म! भारत में शुरू हुआ INS-343 का निर्माण, टैंक-तोप और मिसाइल की बढ़ेगी सटीक मार

विदेशी निर्भरता खत्म! भारत में शुरू हुआ INS-343 का निर्माण, टैंक-तोप और मिसाइल की बढ़ेगी सटीक मार

India News : युद्ध में प्रयोग होने वाले हथियारों के मामले में भारत अब खुद ही आत्मनिर्भर होता जा रहा है। अब विदेशी निर्भरता को कम किया जा रहा है। युद्ध में हथियार कितना शक्तिशाली है, यह जितना मायने रखता है, उतना ही जरूरी है कि वह सही दिशा में जाए और लक्ष्य को सटीक भेद सके। टैंक, तोप या मिसाइल को दिशा और स्थान बताने वाले 'इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम' के लिए अब भारत को विदेशी कंपनियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। ऑर्डिनेंस केवल फैक्ट्री चंडीगढ़ में इसका स्वदेशी निर्माण शुरू हो गया है।

शुक्रवार को फ्रांस की साफरान से टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के बाद तैयार 24 सिस्टम की पहली खेप एलएंडटी सूरत भेजी गई, अगले महीने 26 सिस्टम की दूसरी खेप जाएगी। इस मौके पर हुए हवन में फ्रांसीसी मेहमानों और अफसरों ने हिस्सा लिया। फ्लैग ऑफ समारोह में संयुक्त सचिव (रक्षा) डॉ. गरिमा भगत मुख्य अतिथि के रूप में बीसी से जुड़ीं। आईओएल देहरादून की सीएमडी शर्मिष्ठा कौल, एलएंडटी प्रमुख डॉ. रामचंद्रन और साफरान के प्रमुख मिस्टर जिरार्ड भी मौजूद रहे। 1963 से कार्यरत ओसीएफ टी-72/टी-90 टैंकों और बीएमपी वाहनों के लिए पेरिस्कोप व केबल हार्नेस बनाती रही है।

15 साल का एक्सक्लूसिव अधिकार

22 दिसंबर 2025 को फ्रांस की साफरान के साथ हुए समझौते के तहत ओसीएफ अगले 15 वर्षों तक भारत में INS-343 की एकमात्र निर्माता रहेगी। इसका उपयोग सेना, भारत डायनेमिक्स लिमिटेड और निजी रक्षा निर्माता कर सकेंगे।

विशाल ऑर्डर और स्वदेशी लक्ष्य

ओसीएफ को 2 वर्षों में करीब 1,700 सिस्टम और 10 वर्षों में 25,000 से 30,000 करोड़ रुपये के ऑर्डर की उम्मीद है। इसमें 50% से अधिक स्वदेशी सामग्री होगी।

जर्मनी वाला 'टॉरपीडो वायर' भी स्वदेशी

ओसीएफ ने नौसेना के लिए 0.5 एमएम का ट्विन-वायर केबल विकसित किया है, जो पहले जर्मनी से आता था। नौसेना से प्रमाणित यह वायर 18 किमी तक बिना जोड़ या टूट-फूट के टॉरपीडो को डेटा और संकेत भेजता है।

कैसे काम करता है INS?

इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम (INS) किसी भी सैन्य प्लेटफॉर्म की दिशा और स्थिति के बीच तालमेल बिठाने का काम करता है। युद्ध के दौरान सटीक निशाना लगाने के लिए ओसीएफ में बना INS-343 मुख्य रूप से भारतीय थल सेना के टैंक, आर्टिलरी गन और मिसाइल के लिए डिजाइन किया गया है।

ऑर्डिनेंस केबल फैक्ट्री चंडीगढ़ चीफ जनरल मैनेजर दुष्यंत कुमार ने कहा कि युद्ध में लक्ष्य को सटीकता से भेदने के लिए गाइडेंस-नेविगेशन जरूरी है। INS-343 का निर्माण अब चंडीगढ़ में होगा, जिसमें 50% से अधिक स्वदेशी सामग्री होगी। अब हमें किसी विदेशी सरकार पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

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