हरियाणा में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए नए स्वास्थ्य संस्थानों का निर्माण किया जा रहा है। इसी कड़ी में कैथल में पुराने अस्पताल की बिल्डिंग को तोड़कर 100 बेड का मदर चाइल्ड केयर अस्पताल बनेगा। इसकी प्रक्रिया शुरू हो गई है। पहले चरण में पीडब्ल्यूडी की तरफ से 16 करोड़ रुपए के टेंडर लगाए गए हैं। इस अस्पताल पर करीब 20 से 22 करोड़ रुपए खर्च होंगे। फिलहाल पुराने अस्पताल परिसर में खड़े 35 पेड़ निर्माण में अड़चन बने हुए हैं। क्योंकि नियमों के अनुसार पेड़ों को काट नहीं सकते। इसलिए स्वास्थ्य विभाग ने इन पेड़ों की कटाई के लिए वन विभाग को लिखा है।
अब कोर्ट का सहारा लेकर स्वास्थ्य सेवाओं का हवाला देकर पेड़ काटने की अनुमति मांगी जाएगी। मदर चाइल्ड केयर अस्पताल बनने के बाद जिले में प्रसूति के दौरान या प्रसुति के बाद जच्चा-बच्चा को किसी भी गंभीर हालत में रेफर नहीं किया जाएगा। फिलहाल केवल सिविल अस्पताल में एसएनसीयू की सुविधा है, जिसमें रेडिएंट वार्मर से लेकर विभिन्न प्रकार की सुविधा है, लेकिन बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर की कमी से यहां पर भी दिक्कत है। डॉ. अनिल अग्रवाल ही बाल रोग के स्पेशलिस्ट डॉक्टर हैं। वो ओपीडी से लेकर एसएनसीयू की जिम्मेदारी संभाले हुए हैं।
गर्मी, आग व बारिश से बचाव के भी होंगे इंतजाम
भवन में मरीजों की सुविधा और भवन की सुरक्षा के प्रबंध रहेंगे। गर्मी का असर कम करने वाली टाइलें लगाई जाएंगी। इसी क्षेत्र में वॉटरप्रूफिंग का काम भी होगा। आग से सुरक्षा के लिए अग्निशमन यंत्र, इलेक्ट्रिक व डीजल चालित फायर पंप लगाए जाएंगे। दृष्टिबाधित लोगों की आवाजाही आसान बनाने के लिए करीब 220 वर्ग मीटर टैक्टाइल टाइलें बिछाई जाएंगी। इसके अलावा बारिश के पानी को जमीन में पहुंचाने के लिए रिचार्ज पिट का निर्माण होगा।
एक ही छत के नीचे मिलेंगी मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाएं
एमसीएच विंग में ऑपरेशन थिएटर, नवजात शिशुओं की विशेष देखभाल के उपकरण और विशेषज्ञ डॉक्टरों की सुविधा उपलब्ध कराने की योजना है। इसका उद्देश्य प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताओं और जन्म के बाद नवजात को होने वाली गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का बेहतर उपचार उपलब्ध कराना है। इससे मरीजों को उच्च केंद्रों पर रेफर करने की जरूरत कम करने में मदद मिल सकती है। जिले की करीब 13 लाख आबादी को इस परियोजना के पूरा होने का इंतजार है।
कैथल सिविल सर्जन डॉ. बलविंद्र गर्ग ने बताया कि जिले में उच्च स्तरीय सुविधाओं से लैस 100 बेड का एमसीएच विंग बनाया जाएगा। इसके निर्माण पर करीब 20 करोड़ रुपए खर्च होंगे। भवन निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है। परिसर में खड़े पेड़ों को हटाने के लिए वन विभाग से अनुमति मांगी गई है। उम्मीद है कि जल्द ही परमिशन मिलेगी और काम शुरू हो जाएगा। यह स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में जिले के लिए बड़ा प्रोजेक्ट है।
अनिल चौधरी को विभिन्न मीडिया संस्थानों में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत (हरिभूमि हिंदी समाचार पत्र) से प्रिंट मीडिया में की, जहां खबरों की बुनियादी समझ और लेखन की गंभीरता सीखी। इसके बाद उन्होंने अमर उजाला (हिंदी समाचार पत्र) में 7 वर्षों तक कार्य किया। अनिल कुमार की बिजनेस, मनोरंजन, सरकारी योजनाएं और रेलवे से संबंधित खबरों पर मजबूत पकड़ है। वर्तमान में अनिल कुमार डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपनी सेवाएं दे रहे हैं।