जैसलमेर। जैसलमेर पुलिस ने घरों में घुसकर चोरी करने वाले एक शातिर अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जिला पुलिस अधीक्षक अभिषेक शिवहरे के निर्देशन में चित्तौड़गढ़ जिला विशेष टीम के सहयोग से की गई इस संयुक्त कार्रवाई में पुलिस को घटना के महज 20 दिन के भीतर बड़ी सफलता मिली है। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने जैसलमेर जिले के विभिन्न क्षेत्रों में कई वारदातों को अंजाम देने की बात स्वीकार की है।
जांच की शुरुआत 5 अक्टूबर 2026 की रात भैंसड़ा गांव में हुई दो घरों में चोरी की घटनाओं से हुई। परिवादी भंवरूराम ने सांकड़ा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई कि चोरों ने उनके घर से सोने-चांदी के आभूषण और नकदी पार कर दी। उसी रात उनके चचेरे भाई राजेश कुमार के घर को भी निशाना बनाया गया, जहां से चोर अलमारी तोड़कर नकदी और चांदी की पायजेब ले गए। इन घटनाओं के बाद पुलिस ने त्वरित खुलासे के लिए विशेष टीमों का गठन किया और संदिग्ध मार्गों का बारीकी से विश्लेषण शुरू किया।
पुलिस की विशेष टीमों ने तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर तंत्र का उपयोग करते हुए आरोपियों की पहचान की। सांगड़ थानाधिकारी राजेश कुमार के नेतृत्व में टीम ने चित्तौड़गढ़ जिले में दबिश दी और दिन-रात मेहनत कर गिरोह तक पहुंचने में कामयाबी हासिल की। गिरफ्तार आरोपियों में जसवंत कंजर, लोकेश, बहादुर दरोगा, धर्मराज दरोगा और राहुल कुमार सोनी शामिल हैं, जो सभी चित्तौड़गढ़ जिले के निवासी हैं।
आरोपियों ने पूछताछ में चेलक, सांवला, झाबरा और फतेहगढ़ सहित कई स्थानों पर चोरी की वारदातें करना कबूला है। गिरोह का काम करने का तरीका बेहद शातिर था। वे अपने मोबाइल फोन बंद कर ट्रेलर या बोलेरो जैसे वाहनों का उपयोग करते थे। वारदात स्थल से कुछ किलोमीटर दूर उतरकर वे पैदल ही घरों की रैकी करते थे और चोरी के बाद तय स्थान पर वापस आकर सीधे अपने गृह जिले की ओर निकल जाते थे।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, मुख्य आरोपी जसवंत कंजर का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है। उसके खिलाफ बूंदी, भीलवाड़ा, पाली और नागौर सहित कई जिलों में 2019 से 2022 के बीच चोरी और आर्म्स एक्ट के 16 मामले दर्ज हैं। फिलहाल पुलिस टीम आरोपियों से अन्य वारदातों के संबंध में गहन पूछताछ कर रही है और मामले में अग्रिम अनुसंधान जारी है।


