हरियाणा के शहरों का मुसीबत बना कचरे के समाधान के लिए सरकार ने कदम उठाया है। अब वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट लगाकर कचरे से खाद व ईंधन बनाया जाएगा और कूड़े के लगने वाले ढेर से राहत मिलेगी। इसी कड़ी में फरीदाबाद शहर के कूड़े के लिए भांकरी गांव की जमीन पर डंपिंग यार्ड पर निस्तारण प्लांट लगाया जाएगा, जिसमें प्रतिदिन 600 टन कूड़ा निस्तारण होगा। इस कूड़े का निस्तारण करके आरडीएफ यानी रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल और खाद तैयार की जाएगी, जिन्हें अलग-अलग जगहों पर प्रयोग किया जाएगा।
निस्तारण प्लांट लगाने के लिए सरकार की ओर से 17 करोड़ रुपये मंजूर कर दिए गए हैं। निगम अधिकारियों की मानें तो एक माह में निस्तारण प्लांट को शुरू कर दिया जाएगा। इस परियोजना के तहत लगभग 4,38,000 मीट्रिक टन ठोस कचरे के प्रसंस्करण का प्रस्ताव है।
भांकरी गांव की जमीन पर डंपिंग यार्ड बनाने को लेकर कई दिनों से विरोध चल रहा है। लोग डंपिंग यार्ड के विरोध में धरने पर भी बैठे थे। इसके साथ ही लोगों ने रविवार को डंपिंग यार्ड बनाने के विरोध में पंचायत भी की थी। वहीं सोमवार को सैनिक कालोनी और अचीवर्स सोसायटी के लोगों ने कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल से उनके कार्यालय में जाकर मुलाकात की। लोगों ने कहा कि कचरा जमा होने से भूजल दूषित हो जाएगा। इस पर मंत्री की ओर से कहा कि वह सभी की समस्या को सुनकर उचित समाधान निकालेंगे।
पानी को ट्रीट करने के लिए ईटीपी प्लांट लगाया जाएगा
दावा है कि प्लांट से किसी भी प्रकार की दुर्गंध को खत्म करने को लेकर नियमित रूप से बायो कल्चर स्प्रे किया जाएगा। इसके साथ ही प्लांट में एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट भी लगाया जाएगा, जिससे गंदे पानी का शोधन होगा और भूमि व भूजल सुरक्षित रहेंगे। सुरक्षा के लिए अग्निशमन प्रणाली की भी व्यवस्था रहेगी। किसी को दिक्कत नहीं होगी।
प्लांट में होगी 35 कर्मचारियों की नियुक्ति
निस्तारण प्लांट चलाने का ठेका निजी एजेंसी को दिया जाएगा। जिसमे 35 कर्मचारियों की नियुक्ति की जाएगी। इसके साथ तीन ट्रामेल मशीन, एक श्रेडर और एक बेलिंग मशीन लगाई जाएगी। ट्रामेल मशीने कचरे को छांटकर अलग करेगी। श्रेडर उसे बारीक करेगा। वहीं बेलिग मशीन उपयोग पदार्थों को पुनर्चक्रमण के लिए तैयार करेगा।
कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल ने बताया कि भांकरी में कचरा जमा नहीं होगा। यह साइट केवल कचरा डालने के लिए नहीं होगी, बल्कि यहां आने वाले पूरे कचरे की आधुनिक मशीनों से प्रोसेसिंग की जाएगी। कचरे को छांटकर उसका वैज्ञानिक निस्तारण किया जाएगा, जिससे साइट पर कचरे के ढेर नहीं लगेंगे और कचरा शेष नहीं बचेगा। स्थानीय लोगों को किसी भी प्रकार की समस्या नहीं होने दी जाएगी।
अनिल चौधरी को विभिन्न मीडिया संस्थानों में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत (हरिभूमि हिंदी समाचार पत्र) से प्रिंट मीडिया में की, जहां खबरों की बुनियादी समझ और लेखन की गंभीरता सीखी। इसके बाद उन्होंने अमर उजाला (हिंदी समाचार पत्र) में 7 वर्षों तक कार्य किया। अनिल कुमार की बिजनेस, मनोरंजन, सरकारी योजनाएं और रेलवे से संबंधित खबरों पर मजबूत पकड़ है। वर्तमान में अनिल कुमार डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपनी सेवाएं दे रहे हैं।