हरियाणा सरकार द्वारा शहरों के बाहर से रिंग रोड बनाने की प्रक्रिया में तेजी ला दी है। रिंग रोड बनाने के लिए जमीन को चिन्हित करके जमीन अधिग्रहण के विकल्पों पर चर्चा की जा रही है। हिसार शहर के बाहर भी 41 किलोमीटर लंबा रिंग रोड बनाया जाएगा। इन गांवों की जमीन को अधिग्रहण करने के लिए 1500 करोड़ रुपये का बजट बनाया गया है। अब जमीन अधिग्रहण के बजट को लेकर मंथन किया जा रहा है। दीपावाली के आसपास इस परियोजना को लेकर बड़ी घोषणा होने की उम्मीद है।
फिलहाल सबसे अहम सवाल जमीन अधिग्रहण के लिए 1500 करोड़ रुपये की व्यवस्था करने का है। इसके लिए सरकार के सामने दो विकल्प हैं। पहला केंद्र और राज्य सरकार मिलकर 750-750 करोड़ रुपये दे। दूसरा जमीन की रजिस्ट्री से मिलने वाले टैक्स रेवेन्यू का दो प्रतिशत हिस्सा 15 साल तक भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) को दिया जाए।
इन दोनों विकल्पों पर विचार करने के लिए गठित चार सदस्यीय कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। अब सरकार को तय करना है कि वह किस विकल्प के जरिए जमीन अधिग्रहण के लिए धनराशि उपलब्ध कराएगी। इस फैसले के साथ ही रिंग रोड परियोजना को धरातल पर उतारने की दिशा में आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो सकता है। योजना के अनुसार, वर्ष 2027 तक जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कराने की तैयारी है।
परियोजना को लेकर बनाई गई कमेटी में पीडब्ल्यूडी विभाग के एसीएस चेयरमैन थे। इसके अलावा टाउन एंड कंट्री प्लानिंग, फाइनेंस विभाग के अलावा जीएसटी कमिश्नर को भी शामिल किया गया था। सरकार आने वाले जीएसटी को भी एनएचएआइ को देने पर विचार कर सकती है।
इन गांवों की जमीन का किया जाएगा अधिग्रहण
हिसार में प्रस्तावित रिंग रोड के निर्माण के लिए हिसार के आसपास के गांवों की जमीन को चिन्हित कर लिया है। इनमें मुकलान, देवा, हरिकोट, कैमरी, लाडवा, भगाना, मध्यड़, खरङ, नियाणा, धान्सू और तलवंडी राणा सहित गांधी नगर क्षेत्र का नाम शामिल है। जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होने से पहले वित्तीय व्यवस्था को अंतिम रूप देना जरूरी है। इसके बाद निर्माण से सबंधित आगामी औपचारिकताओं पर काम होगा। ऐसे में सरकार का फैसला परियोजना के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।
आसपास के राज्यों को भी होगा लाभ
हिसार में प्रस्तावित रिंग रोड की लंबाई करीब 41 किलोमीटर होगी। इसके निर्माण से राजगढ़ रोड को चंडीगढ़ रोड से जोड़ने की योजना है। यह मार्ग हिसार में बढ़ते यातायात दबाव को कम करने के साथ दूसरे राज्यों से आने-जाने वाले वाहन चालकों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकता है। हरियाणा के अलावा राजस्थान, पंजाब और चंडीगढ़ की ओर से आने वाले वाहनों को भी इससे सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
वित्तीय विकल्पों पर निर्णय सबसे महत्वपूर्ण
हिसार रिंग रोड को लेकर अक्टूबर तक वित्तीय विकल्पों पर निर्णय लेकर जमीन अधिग्रहण का काम शुरू करने की तैयारी है। इसके बाद वर्ष 2027 में रिंग रोड परियोजना पर निर्माण कार्य शुरू कराने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि, इसकी समय सीमा सरकार के निर्णय और जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ने पर निर्भर करेगी।
क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बनेगी बेहतर प्रस्तावित रिंग रोड केवल हिसार शहर के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है। राजगढ़ रोड को चंडीगढ़ रोड से जोड़ने वाला यह मार्ग क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है। बाहरी वाहनों को शहर के भीतर से गुजरने की जरूरत कम होने पर ईंधन और समय की बचत होने की संभावना है। साथ ही, यातायात का दबाव घटने से शहर के प्रमुख मार्गों पर आवाजाही व्यवस्थित हो सकती है।
कैबिनेट मंत्री रणबीर गंगवा ने बताया कि चार विभागों के उच्च अधिकारियों की बनी कमेटी ने रिपोर्ट चार दिन पहले सौंप दी है। दो विकल्प उनके पास है। उन पर इस माह में फैसला कर लिया जाएगा। 1500 करोड़ रुपये जमीन अधिग्रहण के लिए रखे गए है। उम्मीद है जनवरी तक जमीन अधिग्रहण का काम शुरू कर दें। रिंग रोड बनने से किसानों व आम आदमी को बहुत फायदा होगा।
अनिल चौधरी को विभिन्न मीडिया संस्थानों में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत (हरिभूमि हिंदी समाचार पत्र) से प्रिंट मीडिया में की, जहां खबरों की बुनियादी समझ और लेखन की गंभीरता सीखी। इसके बाद उन्होंने अमर उजाला (हिंदी समाचार पत्र) में 7 वर्षों तक कार्य किया। अनिल कुमार की बिजनेस, मनोरंजन, सरकारी योजनाएं और रेलवे से संबंधित खबरों पर मजबूत पकड़ है। वर्तमान में अनिल कुमार डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपनी सेवाएं दे रहे हैं।