हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के बाद रोडवेज विभाग कर्मचारियों ने हड़ताल की तैयारी कर ली है। हरियाणा रोडवेज कर्मचारी संगठनों ने दो दिवसीय हड़ताल का ऐलान किया है। हरियाणा रोडवेज कर्मचारियों ने डिपो स्तर पर अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन देकर चक्का जाम की चेतावनी दी जा चुकी है। परिवहन मंत्री के साथ 8 सितंबर को बनी सहमति का परिपत्र जारी नहीं होने के विरोध में प्रदेश के सभी डिपो में मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपे। मोर्चा ने सरकार को 5 और 6 नवंबर को दो दिवसीय हड़ताल का नोटिस देते हुए चेतावनी दी कि 4 नवंबर तक मांगों से संबंधित परिपत्र जारी नहीं हुए तो प्रदेशभर में रोडवेज का चक्का जाम किया जाएगा।
सांझा मोर्चा के वरिष्ठ सदस्य जयबीर घणघस, मयाराम, रविन्दर राणा, बिजेंद्र जांगड़ा और राजेश फौजी ने संयुक्त बयान में कहा कि बिजली बोर्ड के निजीकरण और गुरुग्राम-नूंह जैसे मुनाफे वाले जिलों में निजी कंपनी पावर-11 को 25 साल के लिए समानांतर लाइसेंस देने के फैसले के खिलाफ बिजली कर्मचारी आंदोलन कर रहे हैं। रोडवेज सांझा मोर्चा इस आंदोलन का पूर्ण समर्थन करता है। उन्होंने कहा कि रोडवेज कर्मचारियों की अपनी मांगों को लेकर 8 सितंबर को परिवहन मंत्री के साथ बैठक हुई थी।
मोर्चा नेताओं का यह आरोप
मोर्चा नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार बिजली विभाग के निजीकरण के साथ रोडवेज में निजी परमिट देकर सरकारी परिवहन व्यवस्था को भी निजी हाथों में सौंपने की दिशा में काम कर रही है। उनके अनुसार, बिजली क्षेत्र में निजीकरण से किसानों और घरेलू उपभोक्ताओं को मिलने वाली सब्सिडी प्रभावित होने का खतरा है, जबकि रोडवेज में निजी परमिट से सरकारी रोजगार पर असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि बिजली कर्मचारियों का आंदोलन जनहित और कर्मचारियों के अधिकारों से जुड़ा है।
ये हैं कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
मोर्चा ने निजी परमिट देने की योजना पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने, परिचालकों का पे-ग्रेड बढ़ाकर लिपिकों के समान तीन वेतन वृद्धि देने और 2008 में भर्ती वंचित परिचालकों की पदोन्नति करने की मांग उठाई। इसके अलावा चालकों के लिए स्टैंड इंचार्ज का अलग पद सृजित करने, चालकों का हैवी पे-ग्रेड निर्धारित करने, 2016 में भर्ती चालकों को नियुक्ति तिथि से नियमित करने और चालक, परिचालक, निरीक्षक, उपनिरीक्षक तथा कर्मशाला कर्मचारियों को पहले की तरह अर्जित अवकाश देने की मांग की गई।
मोर्चा ने 2018 में भर्ती कर्मशाला कर्मचारियों को तकनीकी पदों पर पदोन्नति देने, लंबित बोनस का भुगतान करने, सहायकों के पद बढ़ाने और एसए के रिक्त पद पदोन्नति से भरने की मांग भी रखी। इसके साथ उप-अधीक्षकों के नए पद सृजित करने, सुपरिटेंडेंट की पदोन्नति अवधि 12 वर्ष से घटाकर पांच वर्ष करने, चालक-परिचालक और कर्मशाला कर्मचारियों की नई भर्ती करने तथा 2008 में भर्ती चालकों और परिचालकों को विशेष वेतन वृद्धि देने की मांग शामिल है। मोर्चा ने हेड कारपेंटर और हेड टायरमैन को अन्य हेड कर्मचारियों की तरह एसएसआइ पद पर पदोन्नति देने की मांग भी उठाई।