बांसवाड़ा/जयपुर। जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों के ऐतिहासिक बलिदान को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के उद्देश्य से एक व्यापक देशव्यापी अभियान ने जोर पकड़ लिया है। राजस्थान वनवासी कल्याण परिषद और अन्य संबंधित संगठनों के नेतृत्व में देशभर के 400 जिलों में ज्ञापन सौंपकर केंद्र और राज्य सरकारों से मानगढ़ धाम को अविलंब राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग की गई है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य उस गौरवशाली इतिहास को संरक्षित करना है, जिसने देश की आजादी की नींव में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया था।
बांसवाड़ा, उदयपुर, कुशलगढ़ और बारां सहित राजस्थान के विभिन्न जिलों में जिला कलेक्टरों और उपखंड अधिकारियों के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन दिए गए। इन ज्ञापनों में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि मानगढ़ धाम केवल एक पहाड़ी नहीं, बल्कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। गोविंद गुरु के नेतृत्व में भगत आंदोलन ने जिस तरह से जनजातीय समाज में स्वाभिमान और राष्ट्रीय चेतना का संचार किया, वह आज भी प्रेरणा का स्रोत है।
इतिहास के पन्नों में 17 नवंबर 1913 की वह घटना दर्ज है, जब मानगढ़ पहाड़ी पर अंग्रेजी शासन की गोलियों का सामना करते हुए बड़ी संख्या में जनजातीय महिला, पुरुष और बच्चों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी। यह बलिदान राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के जनजातीय समाज की साझा विरासत है। आयोजकों का मानना है कि इस स्थल को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा मिलने से न केवल इसका संरक्षण होगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति और राष्ट्रनिष्ठा की प्रेरणा भी मिलेगी।
अभियान के समर्थकों ने प्रधानमंत्री की 2022 की यात्रा और राष्ट्रपति द्वारा हाल ही में दी गई श्रद्धांजलि का हवाला देते हुए कहा कि सरकार इस स्थल के महत्व को पहले ही रेखांकित कर चुकी है। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की अनुशंसाओं और शोध-आधारित रिपोर्टों के आधार पर अब समय आ गया है कि इस मांग को ठोस कार्ययोजना में बदला जाए। ज्ञापन में मांग की गई है कि ऐतिहासिक तथ्यों के दस्तावेजीकरण और सांस्कृतिक विरासत के संवर्धन के लिए एक स्पष्ट नीति बनाई जाए।
इस देशव्यापी प्रयास में विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि, संत-महात्मा और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। आयोजकों ने समाज के सभी वर्गों और जनप्रतिनिधियों से इस मांग के समर्थन में एकजुट होने का आह्वान किया है। उनका कहना है कि मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करना जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग को सच्ची श्रद्धांजलि होगी और यह भारत के गौरवशाली इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक सशक्त माध्यम बनेगा।


