डीडवाना। डीडवाना शहर में नगर परिषद ने एक सराहनीय पहल करते हुए कबाड़ का रचनात्मक उपयोग कर 'वेस्ट टू वंडर' पार्क का निर्माण किया है। बेकार और अनुपयोगी सामग्री से तैयार की गई ये कलाकृतियां अब शहर के निवासियों के लिए आकर्षण का मुख्य केंद्र बन गई हैं। इस अनूठे पार्क के माध्यम से नगर परिषद ने यह साबित कर दिखाया है कि कबाड़ को भी कलात्मक स्वरूप देकर उपयोगी बनाया जा सकता है।
नगर परिषद के उपसभापति हरीश मोदी ने बताया कि इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य कबाड़ के प्रति लोगों की सोच में बदलाव लाना है। उन्होंने कहा कि बेकार समझी जाने वाली वस्तुओं को कला में बदलकर न केवल संसाधनों का बेहतर उपयोग किया गया है, बल्कि शहर की सुंदरता में भी चार चांद लगाए गए हैं। यह पार्क अब स्वच्छता और रचनात्मकता का एक जीवंत उदाहरण बन गया है।
पार्क में स्थापित विभिन्न प्रतिमाएं दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर रही हैं। इनमें भारत माता की प्रतिमा विशेष रूप से देशभक्ति का संदेश प्रसारित कर रही है। इसके अलावा, कबाड़ से बनाई गई उल्लू और शेर की प्रतिमाएं भी लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रही हैं। इन कलाकृतियों में छिपी बारीकियां और रचनात्मकता यह दर्शाती हैं कि यदि सही दृष्टिकोण अपनाया जाए, तो अनुपयोगी सामग्री से भी उत्कृष्ट कृतियां तैयार की जा सकती हैं।
समाजसेवी योगेशलाल शर्मा ने नगर परिषद की इस पहल की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह संदेश समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है कि हम कचरे को कचरा न समझें, बल्कि उसे पुनः उपयोग में लाने के तरीके खोजें। यह पार्क लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने का एक प्रभावी माध्यम साबित हो रहा है।
पार्षद नवीन कुंपावत के अनुसार, यह पहल पर्यावरण संरक्षण, पुनः उपयोग और स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि कबाड़ को कला में बदलने की यह प्रक्रिया न केवल शहर को स्वच्छ रखने में मदद करती है, बल्कि लोगों में रचनात्मक सोच को भी बढ़ावा देती है।
डीडवाना के इस 'वेस्ट टू वंडर' पार्क की सराहना हर तरफ हो रही है। ये आकर्षक प्रतिमाएं न केवल पार्क की शोभा बढ़ा रही हैं, बल्कि शहर में संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और रचनात्मक सोच का एक सशक्त संदेश भी दे रही हैं।


