Rajasthan election: राजस्थान प्रदेश में पंचायती इलेक्शन के दौरान पड़ी हुई कुछ रोचक और दिलचस्प बातें भी सामने आ रहे हैं। प्रदेश में कहीं पर वोटरों को रिझाने के लिए प्रत्याशी अलग-अलग दिलचस्प तरीकों से पूरा जोर लगा रहे हैं तो कहीं पर टिकट बांटने को लेकर नेता पार्टियों के दफ्तर तक पहुंच गए हैं। वर्तमान में प्रदेश में हो रहे पंचायत चुनाव में टिकट की कतार में लगे उम्मीदवारों से ज्यादा खींचतान इन्हें बांटने वालों के बीच हो रही है।
यह क्षेत्र मेरा....। यहां का मैं विधायक, इसलिए टिकट बांटने का हक मेरा...। पंचायतराज चुनाव के टिकट बंटवारे की ऐसी ही होड़ करौली जिले में दूसरे नंबर वाली पार्टी में चल रही है। मामला आलाकमान तक पहुंच गया। एक महिला विधायक ने अपनी पीड़ा आलाकमान तक भिजवाई है। उनका कहना है कि टिकट नहीं बांट पाएंगे तो चुनाव कैसे जितवाएंगे। यहां तीसरे चरण में हिंडौनसिटी, श्रीमहावीरजी, शेरपुर-सुरौठ, चौथे चरण में मंडरायल, कुड़गांव, सपोटरा, बालघाट, टोडाभीम में पंचायत समिति सदस्य के चुनाव होने हैं। जीत से पहले विधायक टिकट पर अपने हक के वर्चस्व की लड़ाई लड़ रहे हैं।
निकाय चुनाव में तू-तू, मैं-मैं कर फंसे नेताजी, अब पत्नी को टिकट दिलाना है
चुनाव में मतदाता ही नहीं बल्कि नेता भी भूले-बिसरे मनमुटाव की कसर निकालने के मौके नहीं चूकते। दूसरे नंबर वाली पार्टी में यह मनमुटाव निकाय चुनाव में दो नेताओं के बीच हो गया है। टोंक जिले में निवाई के एक नेताजी जयपुर से आए पार्टी के ही नेताजी से सार्वजनिक मंच पर भिड़ गए थे। अब निवाई वाले नेताजी की फसावट इस कारण है कि पत्नी को जिला परिषद सदस्य का चुनाव लड़वाना चाहते हैं।
क्योंकि जिला प्रमुख की सीट एससी की आई है। तब जिनसे मनमुटाव हुआ, उनकी इस बार भी टिकट वितरण में अहम भूमिका रहने वाली है। चर्चा है कि निवाई के ये नेताजी जयपुर-दिल्ली में आलाकमान तक से मिलकर आ गए हैं। सफाई दे रहे हैं कि तब ज्यादा कुछ नहीं हुआ था, वह तो सोशल मीडिया था, जिसने मामले को तूल दे दिया।
टिकट बंटवाने को लेकर युवाओं में रोष, नेताजी सफाई देते फिर रहे
जयपुर जिले में जिला परिषद सदस्य चुनाव को लेकर पहले नंबर वाली पार्टी के एक पूर्व विधायक टिकट को लेकर युवाओं के निशाने पर आ गए। पिछले दिनों से एक वीडियो वायरल हो रहा है। नेताजी नुक्कड़ सभा में पहुंचे तो युवाओं ने बाहरी को टिकट देने पर रोष जता दिया। युवा बोल पड़े, साहब यहां के लोग मर गए थे, जो बाहरी को टिकट दे दिया। नेताजी ने बात संभालते हुए कहा जो होना था, वह तो हो गया अब तो लाज रख लो। चुनाव पास आ गए हैं, लेकिन टिकट वितरण में जहां नाराजगी सामने आई थी, उसकी भरपाई अब तक नहीं हो पाई है।