Success Story : पैरा एथलीट के घर गरीबी का आलम देखिए, जापान में चल रहे पैरा एशियाई खेलों में सिल्वर मेडल जीतने वाले मनजीत व्यास के गांव भटगांव स्थित घर में मां बिमला देवी के पास मिठाई बांटने के रुपये भी नहीं थे। उसने मन से ही खुश होकर बेटे के सफलता पर प्रसन्नता जताई। मनजीत के पिता मजदूरी करते थे, उनके निधन के बाद बड़े भाई भी मजदूरी करने लगे। मां बिमला देवी ने दृष्टिबाधित बेटे मनजीत को आर्थिक तंगी से जूझकर पाला है। खुशी के मौके पर गांव के सरपंच नीरज दहिया ने 51 किलो लड्डू गांव में बंटवाए।
भटगांव के ताराचंद के घर जन्मे मनजीत व्यास जन्म से ही 50 प्रतिशत दृष्टिबाधित हैं। ताराचंद मजदूरी कर अपने दोनों बेटों नीरज व मनजीत को पाल रहे थे। वर्ष 2009 में पिता के निधन के बाद मां बिमला देवी ने आर्थिक जरूरतों से जूझते हुए बेटों का पालन-पोषण किया। मनजीत ने बताया कि उन्होंने खिलाड़ी ऋषिकांत की प्रेरणा से पहले पोलवाल्ट करना शुरू किया।
राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई मेडल जीतने के बाद वे विदेश में होने वाली प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए क्लासीफिकेशन के ढाई लाख रुपयों का इंतजाम नहीं कर पाए। इसके बाद ऋषिकांत की प्रेरणा से उन्होंने लांग जंप करना शुरू किया, लेकिन घुटने की चोट ने इस गेम में भविष्य खराब कर दिया। मनजीत ने जेवलिन थामा।
कोच नवल के पास किया अभ्यास मनजीत ने बताया जेवलिन थ्रोअर सुमित आंतिल के कोच नवल के पास उन्होंने वर्ष 2022 में अभ्यास शुरू किया। इसके बाद थोड़े दिन में ही वे जेवलिन की बारीकियां सीख गए। वर्ष 2023 में उन्होंन चीन में हुए पैरा एशियाई खेलों में भाग लिया। वहां उन्होंने चौथा स्थान हासिल किया।
इसके बड़ी बाद उन्होंने जापान विश्व चैंपिशनशिप में भाग लेते हुए चौथा, 2025 में दिल्ली में हुई विश्व चैंपियनशिप में भी उसका चौथा स्थान आया। कई प्रतियोगिताओं में भाग लेने के बाद मेडल नहीं मिलने पर मनजीत मायूस नहीं हुए और उन्होंने लगातार कड़ी मेहनत जारी रखी। अब जापान के आइची नागोया में पैरा एशियाई खेलों में मनजीत ने अपने करियर का बेस्ट प्रदर्शन करते हुए 61.71 मीटर थ्रो करते हुए पहला इंटरनेशनल मेडल जीता।
मनजीत बोला मां ही मेरी दुनिया
मेडल जीतने के बाद मनजीत ने बताया कि पिता के निधन के बाद मां बिमला देवी ने बड़े अभावों के साथ पाला है। मां ने घर के खर्च में कटौती कर उसकी खेल के खर्च की जरूरते पूरी की है। बड़े भाई नीरज ने घर चलाने के लिए मजदूरी करते हुए अपना सहयोग दिया है। मनजीत ने बताया कि मां ही उसकी दुनिया है, सबकुछ है। अपना पहला इंटरनेशनल मेडल मां को समर्पित करते है। स्वदेश लौटने पर वे मां को मेडल पहनाएंगे।
मनजीत का गोल्ड का सपना
मनजीत ने बताया कि अब उसका सपना लास एंजल्स में होने वाले पैरालिंपिक में देश के लिए गोल्ड मेडल जीतना है। उसके लिए वे जापान से लौटकर दिन-रात मेहनत करेंगे। उनका अगला लक्ष्य 75 मीटर थ्रो का है, इसे वह अपनी मेहनत के दम पर हासिल कर लेंगे।
पुलिस भर्ती की उम्मीद टूटी तो बेलदार बना मनजीत
मनजीत ने बताया कि वह पुलिस में भर्ती की तैयारी कर रहा था, लेकिन दृष्टिबाधा ने यहां भी उसका रास्ता रोक लिया। कई प्रयास के बाद हर बार उसे मेडिकल में असफलता का सामना करना पड़ता था। ओवरएज होने के बाद 2019 में मनजीत ने ग्रुप डी की नौकरी के लिए परीक्षा दी। वह सोनीपत के सिंचाई विभाग में बेलदार बनने में सफल रहा लेकिन हालात नहीं बदले।