जयपुर। राजस्थान के पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा ने हाल ही में राजस्थान पुलिस अकादमी स्थित बाल संरक्षण केंद्र का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने यूनिसेफ के सहयोग से चल रहे कार्यों की समीक्षा की और केंद्र से जुड़े अधिकारियों को बच्चों की सुरक्षा के लिए एक नई कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि बदलते दौर में बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए केवल पारंपरिक तरीके पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि अनुसंधान और नवाचार की आवश्यकता है।
डीजीपी ने कहा कि साइबर अपराधों के बढ़ते खतरों और बच्चों के खिलाफ होने वाले लैंगिक अपराधों को रोकने के लिए साक्ष्य-आधारित शोध अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने केंद्र के सदस्यों को निर्देश दिए कि वे विभिन्न जिलों में सामने आ रही समस्याओं का गहन अध्ययन करें और उन निष्कर्षों के आधार पर ही जागरूकता अभियान चलाएं। उनका मानना है कि जब तक समस्या की जड़ तक नहीं पहुंचा जाएगा, तब तक प्रभावी समाधान निकालना कठिन होगा।
इस केंद्र का संचालन महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा के निर्देशन और अकादमी निदेशक व अतिरिक्त महानिदेशक संजीव कुमार नार्जरी के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। केंद्र का मुख्य उद्देश्य बाल संरक्षण से जुड़ी चुनौतियों का वैज्ञानिक तरीके से विश्लेषण करना है। पुलिस प्रशासन का मानना है कि अभिभावकों और अन्य हितधारकों की क्षमता विकास के बिना बच्चों को पूरी तरह सुरक्षित नहीं किया जा सकता है।
यूनिसेफ के बाल संरक्षण विशेषज्ञ डॉ. संजय कुमार निराला ने भी इस चर्चा में भाग लिया। उन्होंने कानूनी प्रावधानों के पालन और विषय विशेषज्ञों के माध्यम से नियमित प्रशिक्षण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाना आज की सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।
निरीक्षण के दौरान अकादमी के अतिरिक्त निदेशक शंकर दत्त शर्मा, पुलिस निरीक्षक धीरज वर्मा और यूनिसेफ के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे। सभी अधिकारियों ने एक स्वर में कहा कि बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए पुलिस और सामाजिक संस्थाओं का समन्वय अनिवार्य है। आने वाले समय में इस केंद्र के माध्यम से कई नई गतिविधियां शुरू की जाएंगी, जिनका लाभ सीधे तौर पर आमजन और बच्चों को मिलेगा।


