Rajasthan News: राजस्थान प्रदेश में इन दिनों पंचायत चुनाव का दौर जोरों पर है। पंचायत चुनाव के दौरान कुछ दिलचस्प रोचक बातें भी सामने आए हैं। राजस्थान के करौली में भाजपा से एक दिग्गज पूर्व मंत्री की पुत्रवधू का जिला परिषद सदस्य का टिकट कट गया। टिकट जिस वार्ड से मांगा, वे स्वर्गीय मंत्रीजी के समाज के वोटर की बहुलता वाला है फिर भी बात नहीं बन पाई।
हालांकि टिकट मिला समाज वाले को ही। मंत्रीजी के रहते इन गांवों में बिजली लाने, चिकित्सा सुविधा, सड़कें बनवाने जैसे कई काम हुए थे। पूर्व मंत्रीजी के परिवार वालों को प्रदेश से फार्म भरने का इशारा मिल गया था, लेकिन सूची में नाम ही नहीं आया। वार्ड से 4 दावेदार थे। चर्चा हो रही है कि तीन ने मंत्रीजी की पुत्रवधू के लिए हां कर दी थी।
दशहरे की प्रसादी सरपंच उम्मीदवारों की तरफ से, यहीं से करते रहे रामा-श्यामा
सरपंची का चुनाव लड़ने वालों के लिए दशहरा और नवरात्र फायदे का सौदा बनकर आई। नौरतां उठीं तो मंगलवार को मंदिर-देवरों में प्रसादियां हुईं। करौली-हिंडौनसिटी में अधिकांश जगह इस बार प्रसादी का बंदोबस्त सरपंच उम्मीदवारों की तरफ से था। एक दिन पहले ही पूरे गांव को सपरिवार जीमने के न्योते भेजे गए। कहीं पूड़ी-सब्जी के साथ लड्डू या बूंदी बनी तो कहीं खीर-पुआ का भंडारा दिनभर चला। सरपंच उम्मीदवारों को और क्या चाहिए, दिनभर यहीं लोगों से दशहरे की रामा-श्यामा करते रहे।
नवरात्र आयोजक टोलियां इस बार खुश, चंदे की भरपाई चुनाव से हो गई
नवरात्र में गरबे करवाने वाली गांव-कस्बों की टोलियां इस बार खुश दिखी। नवरात्र के बीच में चुनाव आए तो सरपंच, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य प्रत्याशियों से मन माफिक चंदा मिल गया। कुछ गांवों में तो नौ दिन अलग-अलग अतिथियों में शामिल सभी चुनाव लड़ने वाले ही थे। सभी को माला पहनाई और माता का जयकारा लगवाया गया। बदले में चंदा मिला, वह हर बार से ज्यादा था। चुनाव होने से प्रत्याशियों ने भी किसी भी आयोजन कमेटी को नाराज नहीं किया।
निकाय में क्रॉस वोटिंग, अब टिकट से पहले पाला नहीं बदलने की नसीहत
कहते हैं दूध से जला छाछ को फूंक फूंक कर पीता है। बसवा-बांदीकुई नगरपालिका चुनाव में भाजपा बोर्ड नहीं बना पाई। हार के कारणों की समीक्षा हुई तो कहीं से बात आई कि साहब टिकटों का बंटवारा ठीक नहीं था। पंचायतराज चुनाव में टिकट बंटवारे को लेकर साहब अब ज्यादा सतर्क हो गए हैं। बसवा में भाजपा बहुमत से एक सीट कम थी, लेकिन एक क्रॉस वोटिंग से यह अंतर दो का हो गया। टिकट बांटने वाले अब प्रत्याशियों को पहले से सचेत कर रहे हैं कि पाला नहीं बदलोगे। विधायक इस बार टिकट बांटने में ज्यादा सतर्कता बरत रहे हैं।
अनिल चौधरी को विभिन्न मीडिया संस्थानों में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत (हरिभूमि हिंदी समाचार पत्र) से प्रिंट मीडिया में की, जहां खबरों की बुनियादी समझ और लेखन की गंभीरता सीखी। इसके बाद उन्होंने अमर उजाला (हिंदी समाचार पत्र) में 7 वर्षों तक कार्य किया। अनिल कुमार की बिजनेस, मनोरंजन, सरकारी योजनाएं और रेलवे से संबंधित खबरों पर मजबूत पकड़ है। वर्तमान में अनिल कुमार डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपनी सेवाएं दे रहे हैं।