Hanumangarh News: हनुमानगढ़ जिले में इस बार 63 नई ग्राम पंचायतों के गठन से ग्रामीण लोकतंत्र को नई दिशा मिलने की उम्मीद जगी है। इन पंचायतों के मतदाता पहली बार अपना सरपंच चुनेंगे। इससे गांवों में विकास, बुनियादी सुविधाओं और जनसमस्याओं के समाधान की नई आशा पैदा हुई है। अब निर्वाचित प्रतिनिधियों की जिम्मेदारी होगी कि वे जनता की उम्मीदों पर खरे उतरें। पारदर्शिता, ईमानदारी और जनभागीदारी से ही नई पंचायतें विकास की मिसाल बन सकेंगी।
प्रलोभन की राजनीति पर भारी पड़ेगा जनता का हित
हनुमानगढ़ जिले में पंचायती राज चुनाव में प्रत्याशियों द्वारा वोटरों को तरह-तरह के प्रलोभन देना लोकतंत्र की स्वस्थ परंपरा के लिए चिंता का विषय है। पिछले कुछ वर्षों में देखा गया है कि जिले के कुछ गांव में उपहार, आर्थिक लाभ और अन्य वादों से मतदाताओं को लुभाने की कोशिश हो रही है। मतदाताओं को ऐसे प्रलोभनों से बचकर प्रत्याशियों के चरित्र, विकास की सोच और पिछले कार्यों के आधार पर सही प्रतिनिधि चुनना चाहिए।
महिला सीट पर सियासत पत्नियों से सत्ता की चाह
हनुमानगढ़ जिले में जिला प्रमुख की सीट महिला आरक्षित होने के कारण राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। कई जनप्रतिनिधि अपनी पत्नियों को चुनाव मैदान में उतारने के लिए कांग्रेस और भाजपा से टिकट मांग रहे हैं। सवाल यह है कि क्या यह महिलाओं को नेतृत्व का अवसर देने की पहल है या सत्ता पर अपनी पकड़ बनाए रखने की रणनीति ? लोकतंत्र में जरूरी है कि महिला प्रत्याशियों को स्वतंत्र नेतृत्व का अवसर मिले और चयन योग्यता व जनसेवा के आधार पर हो।
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