भरतपुर। हत्याकांड की जांच के दायरे को बढ़ाते हुए पुलिस प्रशासन ने एक और बड़ी कार्रवाई की है। वैर थाने में तैनात कांस्टेबल पवन कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। कांस्टेबल पर आरोप है कि उनके पास क्षेत्र की खुफिया जानकारी जुटाने की जिम्मेदारी थी, लेकिन उन्होंने भौंडा गांव में बढ़ रहे तनाव की सूचना अपने उच्चाधिकारियों तक नहीं पहुंचाई। इस लापरवाही के कारण प्रशासन ने उनके खिलाफ सख्त विभागीय कदम उठाए हैं।
कांस्टेबल के गांव के लोगों के साथ लगातार संपर्क में होने की बात भी सामने आई है, जिसकी जांच की जा रही है। पुलिस अधीक्षक राजेश मीणा ने शनिवार देर शाम निलंबन के आदेश जारी किए। इससे पहले इस मामले में वैर थाना प्रभारी को निलंबित किया जा चुका है, जबकि ASP व CO को एपीओ किया गया था। हत्याकांड के बाद से ही पुलिस की कार्यप्रणाली और अधिकारियों की भूमिका की गहन समीक्षा की जा रही है, ताकि भविष्य में ऐसी चूक न हो।
घटना के दिन पुलिस की सक्रियता पर भी गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। जानकारी के अनुसार, जिस समय पूर्व विधायक पर हमला हुआ, उस समय स्थानीय पुलिस समय पर मौके पर नहीं पहुंच सकी थी। उन्हें अस्पताल पहुंचाने का कार्य दूसरे थाना क्षेत्र की पुलिस को करना पड़ा था। कांस्टेबल द्वारा अधिकारियों को घटना की पूर्व सूचना न देना इस पूरे मामले में एक बड़ी चूक माना जा रहा है। पुलिस प्रशासन अब यह सुनिश्चित करने में जुटा है कि ड्यूटी में लापरवाही बरतने वाले किसी भी कर्मचारी को बख्शा न जाए।
दूसरी ओर, इस हत्याकांड में पुलिस को बड़ी सफलताएं मिल रही हैं। अब तक कुल नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। शनिवार को तीन और लोगों को हिरासत में लिया गया, जबकि मुख्य आरोपी मुकेश को एक दिन पहले ही पकड़ा गया था। पुलिस की कई टीमें अलग-अलग ठिकानों पर दबिश दे रही हैं ताकि फरार आरोपियों को जल्द पकड़ा जा सके। पुलिस प्रशासन का कहना है कि आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ-साथ पुलिसकर्मियों की जवाबदेही तय करना भी उनकी प्राथमिकता है।


