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डीडवाना का रहस्यमयी हिंगलाज मंदिर: जहाँ आज भी गूंजती है राजा भर्तृहरि की तपस्या

डीडवाना के ऐतिहासिक जोगामंडी आसन और हिंगलाज माता मंदिर की पौराणिक गाथा, जहाँ नवरात्र के दौरान उमड़ रही है श्रद्धालुओं की भारी भीड़।

डीडवाना स्थित ऐतिहासिक हिंगलाज माता मंदिर परिसर
डीडवाना स्थित ऐतिहासिक हिंगलाज माता मंदिर परिसर

डीडवाना। प्राचीन काल में आभा नगरी के नाम से विख्यात डीडवाना शहर आज भी अपनी आध्यात्मिक विरासत के लिए जाना जाता है। यहाँ स्थित जोगामंडी आसन नाथ संप्रदाय का एक प्रमुख केंद्र है, जिसका इतिहास ढाई हजार वर्षों से अधिक पुराना माना जाता है। इस पावन भूमि का संबंध महान सम्राट राजा भर्तृहरि से है, जिन्होंने सांसारिक सुखों का त्याग करने के बाद यहाँ लंबी अवधि तक कठोर साधना की थी। जनश्रुतियों के अनुसार, उज्जैन के राजा ने यहाँ साठ वर्षों तक निवास किया, जिसमें से बारह वर्ष उन्होंने अत्यंत कठिन तपस्या में व्यतीत किए। मंदिर परिसर में एक प्राचीन गुफा भी है, जिसके बारे में कहा जाता है कि यह राजा भर्तृहरि के आवागमन का मार्ग हुआ करती थी।

इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता माँ हिंगलाज की शीश प्रतिमा है। मान्यता है कि राजा भर्तृहरि स्वयं बलूचिस्तान के मुख्य शक्तिपीठ से इस प्रतिमा को लेकर यहाँ आए थे, जिससे यह स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण बन गया। वर्तमान महंत लक्ष्मण नाथ जी महाराज के अनुसार, यह देवी पूरे नाथ संप्रदाय की कुलदेवी के रूप में पूजी जाती हैं। मंदिर में सदियों से अखंड धूणा प्रज्वलित है, जो यहाँ की दिव्य ऊर्जा का प्रतीक है। मुख्य द्वार पर विराजमान बटुक भैरवनाथ की आरती के समय उनके वाहन का स्वतः उपस्थित होना भक्तों के लिए एक चमत्कारिक अनुभव माना जाता है।

मंदिर परिसर में नाथ संप्रदाय के चौबीस सिद्ध संतों की समाधियाँ स्थित हैं। इन समाधियों की गिनती को लेकर एक रहस्य बना हुआ है, क्योंकि कोई भी व्यक्ति इनकी सही संख्या का पता नहीं लगा पाया है। नवरात्र के पावन अवसर पर यहाँ भक्ति का विशेष वातावरण बना हुआ है। विद्वान पंडितों द्वारा दुर्गा सप्तशती के पाठ, विशेष हवन और यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें भाग लेने के लिए दूर-दराज से श्रद्धालु पहुँच रहे हैं।

अखंड ज्योति के दर्शन और मन्नतें मांगने के लिए आने वाले भक्तों के लिए यह स्थान आस्था का बड़ा केंद्र है। सनातन संस्कृति और योग साधना का यह केंद्र न केवल धार्मिक अनुष्ठानों का स्थल है, बल्कि यह उन लोगों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है जो भारतीय इतिहास और पौराणिक रहस्यों को करीब से जानना चाहते हैं। नवरात्र के नौ दिनों तक चलने वाले ये विशेष अनुष्ठान श्रद्धालुओं के जीवन में शांति और सकारात्मकता का संचार करते हैं।

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