भरतपुर। राजस्थान कांग्रेस में आंतरिक कलह एक बार फिर सतह पर आ गई है। पूर्व कैबिनेट मंत्री और वरिष्ठ नेता विश्वेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया के माध्यम से पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और कार्यप्रणाली पर तीखे प्रहार किए हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिस पार्टी ने दशकों तक देश पर शासन किया, आज राजस्थान में उसकी स्थिति बेहद चिंताजनक है और संगठन पूरी तरह से दिशाहीन होकर चल रहा है।
इस नाराजगी के पीछे भरतपुर क्षेत्र की स्थानीय राजनीति में आए बदलाव को मुख्य कारण माना जा रहा है। हाल ही में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा की मौजूदगी में किसान नेता नेम सिंह फौजदार को पार्टी में शामिल कराया गया। फौजदार और विश्वेंद्र सिंह के बीच लंबे समय से राजनीतिक खींचतान चल रही है। डोटासरा द्वारा फौजदार को पार्टी का पटका पहनाए जाने के तुरंत बाद पूर्व मंत्री का यह सार्वजनिक विरोध सामने आया है।
विश्वेंद्र सिंह ने संगठन के कर्ताधर्ताओं को नसीहत देते हुए कहा कि नेताओं को अहंकार की राजनीति त्यागनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के मौजूदा पदाधिकारी संगठन की जड़ों को खुद ही कमजोर कर रहे हैं। उन्होंने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि पार्टी में स्वाभिमानी और वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी की जा रही है, जिससे कार्यकर्ताओं का मनोबल गिर रहा है और युवाओं को सही दिशा दिखाने वाला कोई नहीं बचा है।
पूर्व मंत्री ने कांग्रेस आलाकमान से राज्य के बिगड़े हालात पर तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है। उन्होंने संगठन में महिला शक्ति को उचित प्रतिनिधित्व देने की वकालत भी की। अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वे हमेशा से जनता के सेवक रहे हैं और उन्होंने कभी भी चापलूसी का रास्ता नहीं अपनाया। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनके चाल, चरित्र और चेहरे में कभी कोई अंतर नहीं रहा है और वे अपने भविष्य के फैसलों को जनता की अदालत पर छोड़ते हैं।
यह पहला मौका नहीं है जब विश्वेंद्र सिंह ने पार्टी के प्रति अपनी नाराजगी जाहिर की हो। इससे पहले भी वे भरतपुर-डीग जिला संगठन और पीसीसी चीफ की कार्यशैली पर सवाल उठा चुके हैं। हालांकि उन्होंने अभी तक औपचारिक इस्तीफा नहीं दिया है, लेकिन उनके इस कड़े रुख ने स्पष्ट कर दिया है कि पूर्वी राजस्थान में कांग्रेस की गुटबाजी थमने का नाम नहीं ले रही है, जिससे प्रदेश नेतृत्व के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं।


