पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का आरक्षण कोटे में शामिल होने के बाद अधिक अंक हासिल करके सामान्य सीट पर चयन को लेकर अहम फैसला दिया है। सरकारी नौकरी की चयन प्रक्रिया में अंतिम मेरिट सूची में अधिक अंक हासिल करना ही सामान्य वर्ग की सीट पर चयन का अधिकार नहीं देता।
यदि आरक्षित वर्ग का अभ्यर्थी शुरुआती चरण में कम कटआफ का लाभ लेकर अगले चरण में पहुंचा हो, तो बाद में बेहतर प्रदर्शन के आधार पर सामान्य वर्ग की सीट का दावा नहीं कर सकता। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा में असिस्टेंट प्रोफेसर (कालेज कैडर) इतिहास असिस्टेंट प्रोफेसर इतिहास की भर्ती में अधिक अंक पाने के बावजूद ईडब्ल्यूएस अभ्यर्थी को नहीं मिली सामान्य वर्ग की सीट भर्ती के मामले में यह सिद्धांत स्पष्ट करते हुए आरती की याचिका खारिज कर दी।
जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ की पीठ ने कहा कि सामान्य या अनारक्षित वर्ग किसी विशेष समुदाय के लिए आरक्षित कोटा नहीं है। सभी वर्गों के अभ्यर्थी इसमें योग्यता के आधार पर प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं, लेकिन उन्हें चयन प्रक्रिया के हर अनिवार्य चरण में सामान्य वर्ग के समान मानकों पर खरा उतरना होगा। हरियाणा लोक सेवा आयोग ने दो अगस्त 2024 को विभिन्न विषयों में असिस्टेंट प्रोफेसर पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था। इतिहास विषय के 123 पदों में से 64 सामान्य और 11 ईडब्ल्यूएस वर्ग के लिए थे। चयन प्रक्रिया में स्क्रीनिंग टेस्ट, विषय ज्ञान परीक्षा और साक्षात्कार शामिल थे। आरती ने ईडब्ल्यूएस श्रेणी में आवेदन किया
था। अंतिम मेरिट में उसे 100 में से 51.84 अंक मिले, जबकि सामान्य वर्ग में चयनित एक अभ्यर्थी के 51.06 अंक थे। आरती ने अधिक अंक होने के बावजूद सामान्य वर्ग में चयन न किए जाने को चुनौती दी।
हाईकोर्ट ने पाया कि आरती सामान्य वर्ग की कटआफ के आधार पर स्क्रीनिंग टेस्ट पास नहीं कर सकी थी। सामान्य वर्ग की सीटों के विरुद्ध अगले चरण के लिए शार्टलिस्ट आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों की सूची में भी उसका रोल नंबर नहीं था।


