Haryana Lecturer Transfers : हरियाणा के सरकारी कालेजों में लंबे समय तक विद्यार्थियों को दिखाई देने वाले लेक्चरर का चेहरा बदलने वाला है, क्योंकि अब कोई भी लेक्चरर पांच साल से ज्यादा एक कालेज में नहीं पढ़ा पाएगा। इसके लिए सरकारी महाविद्यालयों में नियमित लेक्चरर और प्रिंसिपल के तबादलों को लेकर हलचल तेज हो गई है।
सरकार ने तबादला प्रक्रिया की तैयारी शुरू कर दी है। तबादला प्रक्रिया लागू होने पर 20 से 25 वर्षों से एक ही कालेज में जमे हुए लेक्चरर को अब दूसरे कालेज पर जाना पड़ेगा और इस जमी-जमाई व्यवस्था को छोड़कर नए माहौल में काम करना होगा। लेक्चरर के लिए 26 अक्टूबर को आवेदन के लिए पोर्टल खोलकर नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए। राज्य सरकार ने एक ही कालेज में पांच साल से ज्यादा समय तक बैठे लेक्चरर को तबादला नीति के दायरे में लिया है।
हालांकि एक साल एक ही कालेज में समय पूरा करने वाले भी इसके लिए आवेदन कर सकते हैं। लेक्चरर से कम से कम तीन पसंदीदा स्टेशनों के विकल्प मांगे गए हैं। विकल्प भरने की अंतिम तिथि 30 अक्टूबर थी, जबकि 31 अक्टूबर तक स्टेशन आवंटित होने की संभावना है। हालांकि पहले होम साइंस के प्राध्यापकों की तबादला सूची जारी हो चुकी है।
प्रदेश के सरकारी कालेजों में पांच हजार के आसपास लेक्चरर हैं। कालेजों में कार्यरत इन लेक्चरर के पहली बार एक साथ तबादले हो रहे हैं। सिरसा में सबसे बड़ा कालेज राजकीय नेशनल कालेज है। इसमें 65 नियमित लेक्चरर हैं। इनमें से कम से कम 60 लेक्चरर तबादला नीति के दायरे में आ रहे हैं।
हरियाणा गर्वनमेंट कालेज एसोसिएशन के जिला प्रधान सुरेंद्र कुमार का कहना है कि 30 अक्टूबर तक आवेदन करने का अवसर था। स्टेशन कब अलाट होंगे, इसके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता। हालांकि ट्रासफर ड्राइव में उनके कालेज के 60 लेक्चरर प्रभावित होंगे।
कपल केस में 10 अतिरिक्त अंक
हायर एजुकेशन की तबादला नीति के अनुसार पति-पत्नी दोनों के सरकारी सेवा में होने की स्थिति में पात्र प्रोफेसरों को 10 अतिरिक्त अंक दिए जाएंगे। एक ही स्टेशन पर पांच साल पूरे कर चुके प्रोफेसरों के लिए तबादला प्रक्रिया में भाग लेना अनिवार्य है। जिन प्रोफेसरों की सेवानिवृत्ति में 18 महीने या इससे कम समय बचा है, उन्हें तबादला नीति से छूट दी गई है।
राजकीय महिला कालेज सिरसा के प्रिंसिपल शत्रुजीत कपूर ने बताया कि तबादला के लिए विकल्प भरवाने के लिए नोडल अधिकारी लगाए गए हैं। पांच साल तक एक ही स्टेशन पर कार्यरत लेक्चरर इसके दायरे में आते हैं।
अनिल चौधरी को विभिन्न मीडिया संस्थानों में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत (हरिभूमि हिंदी समाचार पत्र) से प्रिंट मीडिया में की, जहां खबरों की बुनियादी समझ और लेखन की गंभीरता सीखी। इसके बाद उन्होंने अमर उजाला (हिंदी समाचार पत्र) में 7 वर्षों तक कार्य किया। अनिल कुमार की बिजनेस, मनोरंजन, सरकारी योजनाएं और रेलवे से संबंधित खबरों पर मजबूत पकड़ है। वर्तमान में अनिल कुमार डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपनी सेवाएं दे रहे हैं।