संघर्षों से भरी हुई है वर्ल्ड चैंपियन मनीषा की कहानी, पिता की मौत के बाद आ गया था करियर में भूचाल
आज देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में मनीषा के नाम की चर्चा हो रही है। लेकिन क्या आपको पता है कि मनीषा भनवाला के सिवाहा गांव से निकलकर वर्ल्ड चैंपियन बनने तक के सफर के पीछे संघर्षों की एक लंबी कहानी भी छिपी हुई है। हरियाणा प्रदेश के जींद जिले के छोटे से गांव में एक किसान परिवार से निकलकर मनीषा भनवाला का विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में गोल्ड तक का सफर काफी संघर्ष भरा रहा है।
Manisha Bhanwala: हरियाणा के जींद जिले के छोटे से गांव सिवाहा में जन्मी मनीषा भनवाला ने कुश्ती में वर्ल्ड चैंपियनशिप का खिताब जीतकर प्रदेश और देश का पूरी दुनिया में नाम रोशन कर दिया है। आज देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में मनीषा के नाम की चर्चा हो रही है। लेकिन क्या आपको पता है कि मनीषा भनवाला के सिवाहा गांव से निकलकर वर्ल्ड चैंपियन बनने तक के सफर के पीछे संघर्षों की एक लंबी कहानी भी छिपी हुई है। हरियाणा प्रदेश के जींद जिले के छोटे से गांव में एक किसान परिवार से निकलकर मनीषा भनवाला का विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में गोल्ड तक का सफर काफी संघर्ष भरा रहा है। पिता की मौत के बाद मनीषा के करियर में भूचाल सा आ गया था।
कठिन समय में ढाल बनकर खड़ा रहा भाई
मनीषा बनवाला को कुश्ती में आने के लिए प्रेरित करने वाले उनके पिता सुरेश भनवाला का 2022 में हार्ट अटैक से देहांत हो गया था। पिता के देहांत के बाद मनीषा की दुनिया उजड़ सी गई थी। पिता की हुई अचानक मौत का असर उनके करियर पर भी दिखाई देने लगा था। ऐसे कठिन समय में मनीषा का बड़ा भाई रिंकू भनवाला उनके करियर को संभालने के लिए ढाल बनाकर उनके साथ खड़ा रहा और कुश्ती में हर संभव मदद कर वर्ल्ड चैंपियन बनने का सपना पूरा किया। मनीषा के वर्ल्ड चैंपियन बनने के पीछे उनके परिवार का भी अहम योगदान है। पिता की उंगली पड़कर कुश्ती के मैदान में उतरी मनीषा बड़े भाई रिंकू ने ही उनको रोहतक की प्रसिद्ध चौधरी छोटूराम कुश्ती अकादमी में दाखिला दिलाने में मदद की।
साधारण किसान परिवार से आती है मनीषा भनवाला
जींद जिले के छोटे से गांव सिवाहा की बेटी मनीषा भनवाला ने अपनी मेहनत, हौसले और संघर्ष के दम पर वर्ल्ड चैंपियनशिप का खिताब जीतकर पूरे देश में विशेष पहचान बनाई है। मनीषा का परिवार जींद जिले में साधारण किसान परिवार है। किसान परिवार होने के बावजूद उनके पिता सुरेश भनवाला ने बेटी की प्रतिभा को पहचान कर कुश्ती के मैदान तक पहुंचने के लिए उन्हें प्रोत्साहित किया। मनीषा ने कुश्ती की शुरुआत में फिटनेस सुधारने और वजन कम करने के लिए अभ्यास शुरू किया था।
वर्ल्ड चैंपियन बनने से पहले भी मनीषा मनवा चुकी है अपनी प्रतिभा का लोहा
मनीषा ने वर्ल्ड चैंपियन बनने से पहले कैडेट विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक, दक्षिण एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक, कामनवेल्थ कुश्ती चैंपियनशिप में रजत पदक, विश्व सैन्य खेलों में स्वर्ण पदक, एशियन कुश्ती चैंपियनशिप में तीन बार कांस्य पदक, राष्ट्रीय खेलों में दो बार स्वर्ण पदक और जीतकर और जार्डन के अम्मान में एशियन कुश्ती चैंपियनशिप भी स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुकी है। मनीषा आज कुश्ती में वर्ल्ड चैंपियन बनकर खासकर ग्रामीण क्षेत्र की लड़कियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।
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