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Trending News : बास हो तो ऐसा! ड्राइवर की रिटायरमेंट के दिन IAS अधिकारी खुद बने ड्राइवर

Trending News : बास हो तो ऐसा! ड्राइवर की रिटायरमेंट के दिन IAS अधिकारी खुद बने ड्राइवर

भारत में IAS अधिकारी बनना हर युवा की इच्छा होती है, जहां पर अपनी मेहनत के बल पर काफी लोग इस मुकाम को हासिल भी कर लेते है, लेकिन IAS अधिकारी बनने के बाद सामाजिक व मानवीय रिश्तों से काफी लोग दूरी बना लेते है। लेकिन काफी ऐसे अधिकारी है जो IAS अधिकारी जैसा पद हासिल करने के बाद भी मानवीय रिश्तों की कदर करने से पीछे नहीं रहते है।

ऐसा ही हरियाणा कैडर का IAS अधिकारी सुशील सारवान है। जो अपने ड्राइवर की सेवानिवृति पर मानवीय व सामाजिक रिश्तों को नहीं भूले। उनकी सरकारी गाड़ी पर चालक की सेवानिवृति पर उनकी गाड़ी का ड्राइवर बनकर उनके घर तक पहुंचाने का काम किया। सुनील सारवान हरियाणा विकास एवं पंचायत विभाग के निदेशक है, लेकिन उनके व्यवहार व मानवीय रिश्तों की एक खूबसूरत मिसाल पेश की हर जगह पर प्रशंसा हो रही है।

हरियाणा रूरल डेवलपमेंट फंड (एचआरडीएफ) बोर्ड में चालक के पद पर कार्यरत यब्बू प्रसाद पांडे की 30 अक्टूबर को सेवानिवृति थी। सेवानिवृति पर यब्बू प्रसाद पांडे ने भी सोचा था कि उनकी नौकरी की आखिर सेवा के दिन इतना सम्मान मिलेगा। उनके विभाग के बॉस IAS अधिकारी सुशील सारवान ने खुद खुद गाड़ी चलाकर उनके घर तक पहुंचाया।

अधिकारी की इस सादगी, विनम्रता और अपनत्व ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। जहां पर बॉस को गाड़ी को बैठाकर इस पर यब्बू प्रसाद पांडे चलाते थे, लेकिन अपनी नौकरी की आखिर दिन की सेवा में उनके ही बॉस IAS अधिकारी सुशील सारवान द्वारा गाड़ी चलता देखकर खुशी ठिकाने नहीं रही। यब्बू प्रसाद पांडे ने 28 अप्रैल 1993 को हरियाणा सरकार में अपनी सेवाएं शुरू की थीं। 31 अक्टूबर 2026 को 33 वर्ष 6 माह की लंबी सेवा पूरी करने के बाद वह सेवानिवृत्त हो गए।

यब्बू प्रसाद पांडे ने अपनी सेवा के दौरान कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों, मुख्य सचिवों एवं अतिरिक्त मुख्य सचिवों के साथ काम करने का अवसर प्राप्त किया, लेकिन उनकी सेवा के आखिर दिन जो सम्मान मिला वह उसको कभी नहीं भूला पाएंगे।

ड्राइवर बोले-सरकारी नौकरी जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा

अपने विदाई संदेश में पांडे ने कहा कि उनके लिए सरकारी नौकरी केवल रोजगार नहीं, बल्कि जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। इस दौरान उन्हें वरिष्ठ अधिकारियों और सहकर्मियों से बहुत कुछ सीखने को मिला।

उन्होंने आरके तेजा, आरके वर्मा, आरपी चंद्रा, हरदीप कुमार, अमिलश लिखी, एसके मोगा, अमित झा, अनुराग रस्तोगी, शिव रमन गौड़, उर्वशी गुलाटी, पी. राधाकृष्ण राव, राम निवास, नवराज सिद्धू और सुधीर राजपाल सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारियों के प्रति आभार जताया।

पांडे ने भावुक होते हुए कहा कि भले ही वह सरकारी जिम्मेदारियों से सेवानिवृत्त हो रहे हैं, लेकिन अपने अधिकारियों और सहकर्मियों के साथ बने रिश्ते कभी सेवानिवृत्त नहीं होंगे।

बॉस का कर्मचारी के प्रति सम्मान

निदेशक सुशील सारवान का खुद वाहन चलाकर अपने सहयोगी को घर छोड़ने जाना महज विदाई की औपचारिकता नहीं, बल्कि कर्मचारी के प्रति सम्मान और अपनत्व का उदाहरण बन गया। उनकी इस पहल की अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच सराहना हो रही है।

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