Maize price high : देश के किसान फसल के न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी देने के लिए संघर्ष करते रहते है, लेकिन फिर भी किसानों की पूरी फसल एमएसपी पर नहीं बिक पाती है, लेकिन मक्का ऐसी फसल हो गई है, जहां पर किसानों की डिमांड के बिना ही एमएसपी पर ज्यादा कीमतों पर बिक रहा है।
जहां पिछले डेढ़ माह में ही मक्का की कीमतों में 300 रुपये क्विंटल का उछाल आया है। ऐसे में मक्का उत्पादक किसानों पर इन दिनों धनवर्षा हो रही है और जिस तरीके से डिमांड बढ़ रही है तो इसके भाव में ओर तेजी आने की संभावना है। केन्द्र सरकार एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को बढ़ावा दे रही है। कंपनियों द्वारा एथेनॉल मक्का से तैयार किया जा रहा है और इस एथेनॉल को पेट्रोल में मिश्रण करके वाहनों में भरा जा रहा है।
ऐसे में अचानक ही निकली डिमांड से मक्का के भाव में लगातार उछाल आता जा रहा है। देश में चीनी और पर्याप्त चावल उपलब्ध नहीं होने से एथेनाल इंडस्ट्री बड़े पैमाने पर मक्का पर निर्भर हो गई है। यही वजह है कि मक्का की कीमतें करीब डेढ़ माह के दौरान 300 रुपए प्रति क्विंटल उछल गई हैं। जयपुर मंडी में मक्का के थोक भाव 2825 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंच गए हैं।
मंडी कारोबारी विजय माहेश्वरी ने बताया कि मक्का उत्पादक क्षेत्रों में मानसून की कमी के चलते खरीफ की मक्का के उत्पादन में कमी आई है। इसके अलावा मुर्गी पालन (पोल्ट्री फीड), पशु आहार और स्टार्च प्रोसेसिंग प्लांटों में मक्का की निरंतर डिमांड बनी हुई है।
एमएसपी से ऊपर हुई कीमतें
वर्तमान में 80 प्रतिशत मक्का स्टॉक में जा रही है। बिहार की हरियाणा डिलीवरी मक्का के भाव फिलहाल 3150 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास चल रहे है। राजस्थान की चित्तौड़गढ़, निम्बाहेडा, कोटा एवं बारां आदि मंडियों में प्रतिदिन 5 लाख बोरी मक्का उत्तर रही है। कम आपूर्ति, हाजिर बाजार में सीमित आवक और पड़ौसी देशों जैसे नेपाल एवं बांग्लादेश को होने वाले निर्यात के चलते घरेलू बाजार में मक्का की कीमतें एमएसपी से भी ऊंची चल रही हैं।


