New Opium Policy: केंद्र सरकार की घोषित नई अफीम नीति के विरोध में अफीम उत्पादक किसानों का आक्रोश गहराने लगा है। नीति में विसंगतियों और वर्षों पुरानी लंबित मांगों को लेकर किसान अब सड़कों पर उतरने की तैयारी में हैं। किसान नेता आंदोलन की अगुवाई कर रहे हैं, जबकि विपक्ष केवल बयानों तक सीमित नजर आ रहा है। आंदोलन की कड़ी में 29 अक्टूबर को चित्तौड़गढ़ कलेक्टोरेट पर प्रदर्शन होगा, जिसके बाद 30 अक्टूबर को मालवा-मेवाड़ के किसान नीमच कूच करेंगे।
मल्हारगढ़ से किसान नेता श्यामलाल जोकचंद, मनासा से आर सागर कच्छावा और जावद से राजकुमार अहीर ने बताया कि 30 अक्टूबर को सुबह 11:30 बजे किसान आंबेडकर सर्कल पर एकत्र होंगे। यहां से मार्च निकालते हुए किसान उप नारकोटिक्स आयुक्त कार्यालय पहुंचेंगे और नीति में संशोधन की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपेंगे।
मॉर्फिन सीमा बढ़ाने और सीपीएस पद्धति से नाराजगी
किसान नेताओं का कहना है कि नई नीति में न्यूनतम मॉर्फिन की मात्रा 4.2 से बढ़ाकर 4.4 किए जाने से सैकड़ों किसानों के परंपरागत चीरे वाले पट्टे प्रभावित हुए हैं। इसके अतिरिक्त सीपीएस पद्धति के तहत 90 किलो से अधिक डोडा औसत देने वाले किसानों को भी मात्र 5 आरी का पट्टा दिए जाने से भारी असंतोष है। वर्ष 1997-98 से कटे पात्र किसानों के पट्टे बहाल करने और नए लाइसेंस जारी करने की उम्मीद भी पूरी नहीं हुई है।
चित्तौड़गढ़ कलेक्टोरेट पर कल सुबह 11 बजे धरना
भारतीय अफीम किसान संघर्ष समिति (मप्र, राज. व उप्र) के बैनर तले 29 अक्टूबर को सुबह 11 बजे चित्तौड़गढ़ कलेक्टोरेट पर धरना-प्रदर्शन होगा। समिति के संरक्षक मांगीलाल मेघवाल बिलोत ने बताया कि किसान विरोधी नीतियों के लिए जिम्मेदार व्यवस्था के खिलाफ आवाज बुलंद की जाएगी। समिति ने मध्य प्रदेश और राजस्थान के किसानों से बड़ी संख्या में शामिल होकर आंदोलन को सफल बनाने का आह्वान किया है। किसानों की समस्याओं और मांगों को प्रमुखता से उठाया जाएगा।


