Rajasthan News: पंचायतराज चुनाव वाले गांवों में इस बार दीपावली ज्यादा मीठी है। मीठी इसलिए क्योंकि अमूमन दीपावली के दो-तीन दिन में मुंह ज्यादा मीठा होता है, लेकिन कुछ मीठा हो जाए... का त्योहारी सीजन अबकी बार आठ-दस दिन पहले से चल पड़ा है। चुनाव में खड़े प्रत्याशी मतदाताओं का मुंह मीठा करवाने में जुटे हैं। हालांकि मकसद वोट ही है। कोई लड्डू बंटवा रहा है तो किसी की तरफ से मावा-बेसन की बर्फी, खीर मोहन, गुलाब जामनु आ रहे हैं। गांव-कस्बे और शहर के मिठाई विक्रेताओं की दीपावली भी सीजन से पहले शुरू हो गई। एक-एक प्रत्याशी कई किलो मिठाई के ऑर्डर दे रहा है। एक प्रत्याशी ऑर्डर दे दे तो दूसरे को बांटना ही है। मिठाई खाने-खिलाने का यह दौर इस बार दीपावली के बाद के बाद तक चलेगा। कारण अंतिम चरण के चुनाव कहीं-कहीं 16 नवंबर तक हैं।
भाई वोट आपको ही देंगे, दीपावली की पुताई कर चुके, अब पोस्टर मत लगाओ
दीपोत्सव में सप्ताहभर बचा है। घर-दुकानों की सफाई के साथ रंग-रोगन हो चुका या इन दिनों चल रहा है। जहां हो चुका, उन्हें दीवारों की निगरानी करनी पड़ रही है। चिंता इस बात की है कि कोई चुनाव का पोस्टर ना लगा जाए। क्योंकि हटाने पर ये पोस्टर साथ में रंग लेकर निकलते हैं। प्रत्याशियों में भी पोस्टर, बैनर लगाने की होड़ चल रही है। ऐसा ही वाक्या हिंडौनसिटी क्षेत्र के एक गांव में दिखा। प्रत्याशी के समर्थक वोट मांगने और पोस्टर लगाने लगे तो घर वाले का आग्रह सुनाई दिया, भाई... पोस्टर मत चिपकाओ, हम वोट दे देंगे।
गुर्जर-मीणा गांवों का चुनाव... यहां ट्रैक्टर किसान गाड़ी में प्रचार, इन्हीं से शक्ति प्रदर्शन
ये गांवों के चुनाव हैं, इसीलिए तो चर्चा में रहते हैं। यहां प्रचार के तौर-तरीके से लेकर सब-कुछ अलग है। करौली, सवाई माधोपुर जिलों में प्रत्याशियों की रैलियां ट्रैक्टर-किसान गाड़ियों में निकलती है। एक साथ एक-दो दर्जन से ज्यादा ट्रैक्टर और किसान गाड़ी। अमूमन हर प्रत्याशी अपना शक्ति प्रदर्शन ऐसे ही कर रहा है। कहीं रसिया बजते हैं तो कहीं मीणा वाटी गीत। वैसे चुनाव आयोग की रोक है कि किसान गाड़ी प्रचार में शामिल नहीं हो सकती, लेकिन ठेठ गांव-ढाणी से ये नियम दूर ही हैं। श्रीमहावीरजी के गांवों में मंदिरों के पास प्रत्याशियों के प्रचार वाहन दिनभर खड़े रहते हैं। दिनभर रसिया, मीणा वाटी गीतों से प्रचार चलता रहता है।


